Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Jun, 2026 12:55 PM

छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों युवा कांग्रेस का आगामी प्रदेश अध्यक्ष चुनाव चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों युवा कांग्रेस का आगामी प्रदेश अध्यक्ष चुनाव चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। जुलाई में चुनाव होने की संभावनाओं के बीच संगठन के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि इस बार चुनावी मैदान में कई बड़े कांग्रेस नेताओं के परिजन और समर्थक दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाल ही में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वाले 36 नेताओं को दिल्ली बुलाकर इंटरव्यू लिया गया। राष्ट्रीय नेतृत्व ने सभी दावेदारों से व्यक्तिगत चर्चा कर उनके संगठनात्मक अनुभव, पार्टी के प्रति योगदान और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर सवाल किए। अब इन इंटरव्यू के आधार पर अंतिम सूची जारी की जाएगी, जिसमें शामिल उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के पुत्र आदित्य भगत और पूर्व विधायक अरुण वोरा के पुत्र संदीप वोरा को लेकर रही। दोनों युवा नेताओं को संगठन में मजबूत दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के भतीजे आदित्येश्वरशरण सिंहदेव का नाम भी लंबे समय से अध्यक्ष पद की दौड़ में माना जा रहा था, लेकिन उनके चुनाव लड़ने से इनकार ने राजनीतिक हलकों को चौंका दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि चुनावी सरगर्मी केवल युवा नेताओं तक सीमित नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी अपने-अपने समर्थकों को संगठन की कमान दिलाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल युवा कांग्रेस का नेतृत्व तय नहीं करेगा, बल्कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर भविष्य के शक्ति संतुलन और नए राजनीतिक समीकरणों की झलक भी दिखाएगा।
इस बार चुनाव की एक और खासियत सदस्यता अभियान है। युवा कांग्रेस ने सदस्यता शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया है और केवल पंजीकृत सदस्य ही मतदान कर सकेंगे। ऐसे में दावेदारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधिक से अधिक नए सदस्यों को जोड़ने की होगी। संगठन का लक्ष्य प्रदेशभर में 12 से 15 लाख युवाओं को सदस्य बनाने का है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा जारी की जाने वाली अंतिम उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह चुनाव न केवल युवा कांग्रेस के नए नेतृत्व का चयन करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की राजनीति की दिशा और दशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जुलाई में संभावित चुनाव से पहले संगठन के भीतर बढ़ती हलचल यह संकेत दे रही है कि इस बार मुकाबला केवल पद का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की नेतृत्वकारी भूमिका का भी होगा।