नामांकन पत्र खरीद चुके नरोत्तम मिश्रा के अरमानों पर फिरा पानी! इन पांच वजह से आशुतोष तिवारी को मिला दतिया का टिकट

Edited By meena, Updated: 10 Jul, 2026 07:45 PM

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भाजपा में कुछ भी निश्चित नहीं है। कभी कभी सारे आकंलन धरे के धरे रह जाते हैं। भाजपा के बारे में अकसर कहा जाता है कि यह अपने फैसलों को लेकर सबको चौंकाती है...

दतिया : भाजपा में कुछ भी निश्चित नहीं है। कभी कभी सारे आकंलन धरे के धरे रह जाते हैं। भाजपा के बारे में अकसर कहा जाता है कि यह अपने फैसलों को लेकर सबको चौंकाती है। कुछ ऐसा ही हुआ दतिया विधानसभा उपचुनाव में। यहां प्रबल दावेदार नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर भाजपा ने सबको चौंका दिया है। यहां तक कि 8 तारीख को नरोत्तम मिश्रा ने अपने बेटे को भेजकर नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। लेकिन भाजपा ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा है। आशुतोष तिवारी ने संघ के लिए लंबे समय से काम किया। आरएसएस से उनका सीधा कनेक्शन है। उन्हें संघ के प्रचारक के रूप में जाना जाता है। युवाओं से उनकी अच्छी खासी पैठ है और उनकी राजनीतिक छवि बेहद साफ सुथरी मानी जाती है। 

आशुतोष तिवारी दतिया जिले की भांडेर तहसील के ग्राम पिपरउआ के निवासी हैं। वे लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने ग्राम भारती के जिला अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाई और बाद में संभाग स्तर पर भी विभिन्न दायित्व संभाले। वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उन्हें मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था।

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वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में आशुतोष तिवारी ने सेवढ़ा विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन उस समय पार्टी ने प्रदीप अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया था। अब दतिया उपचुनाव में उन्हें भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। ग्वालियर चंबल संभाग में वे बेहद सक्रिय हैं। युवा मोर्चा में भी उनकी भूमिका रही है। दतिया विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। ऐसे में पार्टी ने ब्राह्मण चेहरा सामने ला दिया।

वहीं दूसरी ओर नरोत्तम मिश्रा काफी सक्रिय हो गए थे। उन्होंने लोगों के बीच आना जाना शुरु कर दिया था। लगातार संभाए चल रही थी। वे डोर टू डोर लोगों के बीच जा रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक कहना शुरु कर दिया कि पहली की गलतियां नहीं दोहराई जाएगी। हम जनता के सेवक हैं जनता के लिए काम करेंगे। लेकिन भाजपा के एक फैसले ने सबकों चौंका दिया और नरोत्तम मिश्रा के अरमानों पर पानी फेर दिया।

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