Edited By meena, Updated: 23 Jun, 2026 07:59 PM

मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठनात्मक नियुक्तियों के तहत प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों तथा स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची जारी कर दी है। नियुक्तियों संबंधी आदेश मंगलवार को जारी...
भोपाल : मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठनात्मक नियुक्तियों के तहत प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों तथा स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची जारी कर दी है। नियुक्तियों संबंधी आदेश मंगलवार को जारी किए गए। इस सूची की खास बात यह है कि इसमें दिग्गज मंत्रियों, विधायकों समेत संजय पाठक का नाम भी शामिल है। संजय पाठक पिछले कुछ महीनों से विवादों से घिरे हैं और मामला कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में उनको कार्यसमिति में जगह मिलने की सूचना के साथ ही प्रदेश की राजनीति में सियासी घमासान छिड़ना लगभग तय है।

प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा जारी सूची के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल, विष्णुदत्त शर्मा, तुलसीराम सिलावट, विश्वास सारंग सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। कार्यसमिति में महिला, युवा, अनुसूचित जाति, जनजाति और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया गया है।
मानहानि केस में राज्य सरकार को होईकोर्ट का नोटिस
भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर मानहानि शिकायत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका कटनी के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता नाजिम खान ने दायर की, जिसमें उनकी शिकायत पर विचार कर निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की गई।
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगने की प्रार्थना स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। इतना ही नहीं इससे पहले मामले की सुनवाई कर रहे जज ने खुद को केस से अलग कर लिया था। बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है विधायक संजय पाठक से संबंधित किसी केस की सुनवाई करने से जज ने इनकार किया हो। इससे पहले सितंबर 2025 में अवैध उत्खनन (माइनिंग) से जुड़े एक अन्य संवेदनशील मामले में भी उन्होंने खुद को सुनवाई से दूर कर लिया था। उस वक्त न्यायाधीश ने अपने आधिकारिक आदेश में बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए लिखा था कि संबंधित विधायक द्वारा मामले को प्रभावित करने के उद्देश्य से उनसे सीधे फोन पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया था। ऐसे में संजय पाठक को कार्यसमिति में जगह देकर भाजपा संगठन ने एक नए मुद्दे को छेड़ दिया है।