दिग्विजय पर बयान देकर घिरीं सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री, जयवर्धन बोले - सौदेबाजी न करतीं तो आज घर नहीं, विधानसभा में होतीं

Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Jun, 2026 12:03 PM

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मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस के अंदरूनी हालात चर्चा का विषय बन गए हैं।

ग्वालियर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस के अंदरूनी हालात चर्चा का विषय बन गए हैं। अपने बेबाक बयानों और कट्टर सिंधिया समर्थक छवि के लिए पहचानी जाने वाली पूर्व मंत्री इमरती देवी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने कांग्रेस खेमे में नई बहस छेड़ दी है। उनके निशाने पर इस बार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी रहे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लिए उन्होंने भाजपा के दरवाजे खुले होने का संदेश दिया।

हाल ही में कांग्रेस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें पीसीसी चीफ जीतू पटवारी द्वारा दिग्विजय सिंह को दूसरी कुर्सी पर बैठने का इशारा करते हुए देखा गया। राजनीतिक गलियारों में इस वीडियो को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरती देवी ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।

इमरती देवी ने कहा कि जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस पूरी तरह बिखर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं बचा है और दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेता की भी उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब भाजपा का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है और उसका राजनीतिक पतन स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इमरती देवी ने दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने की खुली सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि भाजपा एक विशाल समुद्र की तरह है और यदि दिग्विजय सिंह पार्टी में आते हैं तो उनका पूरा सम्मान किया जाएगा।

हालांकि इमरती देवी के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तुरंत पलटवार हुआ। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने बिना नाम लिए इमरती देवी के राजनीतिक अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि जिन्होंने वर्षों पहले राजनीतिक सौदेबाजी का रास्ता चुना था, वे आज जनता और भाजपा दोनों की नजरों में हाशिए पर पहुंच चुके हैं।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि यदि इमरती देवी कांग्रेस में बनी रहतीं तो आज विधायक होतीं, लेकिन उन्होंने जो रास्ता चुना उसका परिणाम सबके सामने है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में दल बदल और राजनीतिक सौदेबाजी किसी भी नेता की छवि को नुकसान पहुंचाती है।

इमरती देवी और जयवर्धन सिंह के बीच बयानबाजी ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य है या फिर नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ती दूरी अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगी है। आने वाले दिनों में इस सियासी जंग के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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