Edited By Himansh sharma, Updated: 19 Jun, 2026 05:32 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम की गूंज सुनाई देने लगी है।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम की गूंज सुनाई देने लगी है। पूर्व मंत्री और ज्योतिरादित्य सिंधिया की करीबी मानी जाने वाली इमरती देवी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का न्योता देने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए न केवल इमरती देवी को जवाब दिया, बल्कि भाजपा में गए पूर्व कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए।
विवाद की शुरुआत उस वीडियो से हुई, जिसमें कांग्रेस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दूसरी कुर्सी पर बैठने का इशारा करते दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं के कथित अनादर से जोड़ते हुए निशाना साधा।
इसी क्रम में इमरती देवी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस पूरी तरह बिखर चुकी है और पार्टी में वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का राजनीतिक पतन हो चुका है और वह भाजपा की बराबरी नहीं कर सकती। इमरती देवी ने दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण देते हुए कहा कि भाजपा एक विशाल समुद्र की तरह है, जहां उन्हें पूरा सम्मान और स्थान मिलेगा।
हालांकि कांग्रेस ने इस बयान को राजनीतिक अवसरवाद करार देते हुए पलटवार किया। ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि राजनीति में समय सबसे बड़ा निर्णायक होता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वृंदावन में रहना है तो राधे-राधे कहना है वाली कहावत आज कई नेताओं पर सटीक बैठती है। सिकरवार ने कहा कि 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए नेताओं को अपने राजनीतिक भविष्य पर विचार करना चाहिए और यदि वे लौटना चाहें तो कांग्रेस उनके सम्मान और चिंता दोनों का ध्यान रखेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह बयानबाजी केवल शब्दों की जंग नहीं है, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी से पहले दोनों दलों के बीच चल रही राजनीतिक मनोवैज्ञानिक लड़ाई का हिस्सा भी है। एक ओर भाजपा कांग्रेस के भीतर असंतोष और नेतृत्व संकट का संदेश देने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस उन नेताओं को लेकर राजनीतिक संकेत दे रही है जिन्होंने 2020 में पार्टी छोड़ी थी। फिलहाल, दिग्विजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इमरती देवी और सतीश सिकरवार के बयानों ने यह जरूर साबित कर दिया है कि छह साल बाद भी 2020 का सियासी अध्याय मध्य प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।