दतिया में किस पर लगेगा कांग्रेस का दांव, किसके साथ जाएंगे 95 हजार OBC वोटर? इसी में छिपा है जीत का राज!

Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jul, 2026 12:01 PM

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मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।

दतिया। मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होनी है। चुनावी कार्यक्रम घोषित होते ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों की नजर अब उन सामाजिक वर्गों पर है, जिनका रुझान इस चुनाव का परिणाम तय कर सकता है। दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ग के करीब 95 हजार मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यादव, कुशवाहा-काछी, लोधी, बघेल-पाल सहित अन्य ओबीसी समुदाय इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल किसी एक जाति या वर्ग के समर्थन से जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। ब्राह्मण, अहिरवार, यादव, कुशवाहा, लोधी और मुस्लिम मतदाताओं का रुझान जिस उम्मीदवार के पक्ष में जाएगा, उसी की जीत की संभावना मजबूत होगी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भी मुकाबला बेहद करीबी रहा था, जिसमें कांग्रेस ने भाजपा को 7,742 वोटों से हराया था।

ब्राह्मण और अहिरवार समाज सबसे प्रभावशाली

दतिया के सामाजिक समीकरणों में ब्राह्मण और अहिरवार समाज सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं। दोनों समुदायों के मतदाताओं की संख्या करीब 33-33 हजार बताई जाती है। भाजपा की परंपरागत पकड़ ब्राह्मण मतदाताओं में मजबूत मानी जाती है, जबकि कांग्रेस का प्रभाव अनुसूचित जाति, विशेषकर अहिरवार समाज में रहा है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का मतदान रुझान चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।

सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति भी अहम

विधानसभा क्षेत्र में सामान्य वर्ग के लगभग 60 हजार मतदाता हैं, जिनमें ब्राह्मणों के अलावा राजपूत, बनिया, कायस्थ और सिंधी समाज भी अच्छी संख्या में मौजूद हैं। यदि यह वर्ग किसी एक दल के पक्ष में एकजुट होता है, तो मुकाबला एकतरफा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर अनुसूचित जाति के करीब 58 हजार मतदाता भी चुनावी परिणाम पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। अहिरवार समाज के अलावा जाटव, खटीक, वाल्मीकि और कोरी समाज कई क्षेत्रों में निर्णायक स्थिति में हैं। वहीं करीब 8 हजार मुस्लिम मतदाता भी करीबी मुकाबले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कांग्रेस में टिकट को लेकर बढ़ी हलचल

उपचुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस में टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता तेज हो गई है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए पार्टी टिकट की पैरवी कर रहे हैं। वहीं भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व पाठ्यपुस्तक निगम उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले अवधेश नायक को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने पर राजेंद्र भारती को मैदान में उतारा गया। अब नायक अपने राजनीतिक त्याग और संगठन के प्रति योगदान का हवाला देते हुए टिकट की दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में चर्चा का विषय बना हुआ है।

भाजपा और अन्य दलों की रणनीति

भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे प्रमुख दावेदार माना जा रहा है, जबकि आजाद समाज पार्टी (ASP) से दामोदर यादव का नाम सामने आ रहा है। हालांकि अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक होने की संभावना है। दतिया उपचुनाव केवल राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। टिकट वितरण से लेकर मतदान तक हर चरण पर जातीय संतुलन और स्थानीय मुद्दे चुनावी तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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