Edited By Himansh sharma, Updated: 24 Jun, 2026 01:38 PM
मध्य प्रदेश की राजनीति में मानसून सत्र के बाद बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल सकता है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में मानसून सत्र के बाद बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के संकेत देकर सत्ता और संगठन दोनों के गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यह केवल कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक बुनियाद रखने वाला राजनीतिक ऑपरेशन होगा।सूत्रों के मुताबिक सरकार 5 से 6 मौजूदा मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाकर 7 से 8 नए चेहरों को मौका दे सकती है। इस संभावित फेरबदल का सबसे बड़ा आधार मंत्रियों का प्रदर्शन, क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और संगठन की रिपोर्ट मानी जा रही है।
महिला और बुंदेलखंड कार्ड पर फोकस
भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए महिला मतदाताओं और बुंदेलखंड क्षेत्र को विशेष महत्व देने की तैयारी में है। इसी वजह से रीति पाठक, मालिनी गौड़ और अर्चना चिटनीस जैसे नाम चर्चा में हैं। वहीं सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ जैसे जिलों को प्रतिनिधित्व देकर बुंदेलखंड की नाराजगी दूर करने की भी कोशिश हो सकती है।
OBC समीकरण साधने की तैयारी
राज्य की राजनीति में ओबीसी वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में भाजपा फेरबदल के जरिए इस वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि 2028 के चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को साधना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
इन मंत्रियों पर मंडरा रहा खतरा
मंत्रिमंडल की समीक्षा रिपोर्ट में कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन और विवादों को लेकर सवाल उठे हैं। विजय शाह का नाम लगातार विवादों के कारण चर्चा में रहा है। दिलीप अहिरवार, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और एदल सिंह कंषाना के कामकाज को लेकर भी संगठन स्तर पर असंतोष की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों ने हाईकमान की चिंता बढ़ाई है। यही वजह है कि कई चेहरों का भविष्य अब समीक्षा रिपोर्ट पर टिका हुआ है।
तीन बड़े मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं
फेरबदल केवल नए चेहरों की एंट्री तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। प्रहलाद पटेल को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट के विभागों में पुनर्संतुलन की चर्चा तेज है।
संपतिया उइके को लेकर भी बढ़ी हलचल
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मंत्री संपतिया उइके के कामकाज और विभाग से जुड़ी शिकायतें संगठन के शीर्ष स्तर तक पहुंची हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन फेरबदल की चर्चाओं में उनका नाम भी लगातार सामने आ रहा है।
2028 की रणनीति का पहला चरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि भाजपा की 2028 चुनावी रणनीति का पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है। पार्टी एक तरफ नए चेहरों को अवसर देकर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय, जातीय और संगठनात्मक संतुलन बनाकर चुनावी जमीन मजबूत करने की तैयारी में है। अब सभी की निगाहें मानसून सत्र के बाद होने वाले फैसलों पर टिकी हैं। यदि संकेत हकीकत में बदलते हैं, तो मोहन सरकार का यह पहला बड़ा कैबिनेट फेरबदल प्रदेश की राजनीति में कई नए समीकरण पैदा कर सकता है।