Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Jun, 2026 06:27 PM

मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी दिखाई दे रही है।
भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगातार दिल्ली दौरों और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि राज्य मंत्रिमंडल में जल्द ही व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जून के अंतिम सप्ताह में कैबिनेट विस्तार का रास्ता साफ हो सकता है।सूत्रों के मुताबिक, यह केवल औपचारिक विस्तार नहीं होगा, बल्कि सरकार के प्रदर्शन और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले लिए जाएंगे। जिन मंत्रियों का कामकाज अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। वहीं, संगठन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को साधने के लिए नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की तैयारी है।
सबसे ज्यादा चर्चा उन मंत्रियों को लेकर है जिनके विभागों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनकी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करती रही हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार केवल पदों की अदला-बदली नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं का नया संदेश भी माना जा रहा है।
दूसरी ओर, भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटा है। बुंदेलखंड, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल और विंध्य क्षेत्र से नए चेहरों को अवसर देकर पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना चाहती है। सिंधिया समर्थक खेमे को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे लंबे समय से चल रही राजनीतिक अटकलों को विराम मिल सकता है।
खास बात यह है कि इस बार केवल मंत्री नहीं बदलेंगे, बल्कि विभागों के बंटवारे में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई प्रभावशाली विभाग नए हाथों में जा सकते हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर सरकार में नई ऊर्जा लाने का प्रयास किया जा सकता है।
फिलहाल अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के संकेत पर निर्भर है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में सत्ता का नया समीकरण उभरकर सामने आएगा। अब सभी की नजर दिल्ली से मिलने वाली अंतिम हरी झंडी पर टिकी है, जो प्रदेश सरकार के अगले राजनीतिक अध्याय की पटकथा लिख सकती है।