Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Jun, 2026 12:05 PM

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का मामला अब महज एक चुनावी विवाद न रहकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी टकराव बन गया है।
भोपाल। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का मामला अब महज एक चुनावी विवाद न रहकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी टकराव बन गया है। पार्टी ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए तीखे विरोध और कानूनी लड़ाई दोनों मोर्चों पर उतरने की रणनीति साफ कर दी है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे की गूंज तेज हो गई है।
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस प्रकरण को सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा। पार्टी की ओर से 15 से 17 जून तक प्रदेशव्यापी विरोध कार्यक्रम तय किए गए हैं, जिनमें अलग-अलग संगठनात्मक विंग्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
15 जून को युवा कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी, जबकि 16 जून को एनएसयूआई छात्र संगठन अपनी नाराजगी दर्ज कराएगा। इसके अगले दिन 17 जून को महिला कांग्रेस मोर्चा संभालते हुए इस कार्रवाई के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन करेगी। पार्टी का दावा है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी होगा।
इधर, राजनीतिक हलचल के बीच मीनाक्षी नटराजन दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तथा कानूनी विशेषज्ञों के साथ लगातार रणनीतिक चर्चा कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस मामले में हाईकोर्ट का रुख अपनाने की तैयारी में है और जल्द ही ‘चुनाव याचिका’ दायर की जा सकती है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले में प्रक्रिया जटिल हो सकती है, क्योंकि संबंधित सीट से विजयी सभी उम्मीदवारों को भी पक्षकार बनाए जाने की आवश्यकता होगी, जिससे मामला और अधिक बहस और कानूनी पेचीदगियों में उलझ सकता है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।