मोहन सरकार का बड़ा एक्शन, सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन निरस्त, सरकार का रुख साफ- कानून से ऊपर कोई नहीं

Edited By Desh Raj, Updated: 18 Jun, 2026 09:39 PM

som distilleries license renewal application rejected

मुख्यमंत्री मोहन यादव की “जीरो टॉलरेंस” नीति अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है।

(भोपाल): मुख्यमंत्री मोहन यादव की “जीरो टॉलरेंस” नीति अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और विधि के शासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ राज्य शासन ने सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण संबंधी आवेदन निरस्त कर दिए हैं।

जीरो टॉलरेंस नीति का असर

नवीनीकरण के आवेदनों के निरस्तिकरण का यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उस स्पष्ट और दृढ़ प्रशासनिक नीति का प्रतिबिंब है, जिसके तहत भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार, नियमों के उल्लंघन, राजस्व अपवंचन तथा जनहित के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के प्रति पूर्णतः जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया जा रहा है। प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि निवेश, उद्योग और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ कानून का कठोर एवं निष्पक्ष अनुपालन भी उतना ही आवश्यक है।

आबकारी आयुक्त, द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी लाइसेंस का नवीनीकरण स्वचालित अथवा अधिकार स्वरूप प्राप्त होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए संबंधित संस्था के समग्र आचरण, विधिक अनुपालन, लाइसेंस की शर्तों के पालन, नियामकीय पात्रता, उपलब्ध अभिलेखों की सत्यता और सार्वजनिक हित से जुड़े पहलुओं का समग्र परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915, उससे संबंधित नियमों, उपलब्ध अभिलेखों तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का विस्तृत परीक्षण किया गया।

निर्णय प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी महत्वपूर्ण रहे कि संबंधित समूह से जुड़े मामलों में पूर्व में अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को क्षति पहुँचाने तथा आबकारी कानूनों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित प्रकरण न्यायालयों के समक्ष विचारित हुए थे। उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों, जांच प्रतिवेदनों और न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण करते हुए संबंधित पक्ष के समग्र आचरण और विधिक अनुपालन की समीक्षा की गई। इसके उपरांत नवीनीकरण आवेदनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।

उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि लाइसेंस नवीनीकरण के प्रकरणों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, विधिक प्रावधानों तथा संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र एवं कारणयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए। न्यायालय द्वारा नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार प्रदान नहीं किया गया था। इसी विधिक दृष्टिकोण के अनुरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश में विकास और निवेश की गति को तेज करने के साथ-साथ पारदर्शी, जवाबदेह और नियम आधारित प्रशासन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहाँ ईमानदार उद्यमों और नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, जबकि कानून और जनहित के विरुद्ध कार्य करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और विधिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। शासन की यह नीति न केवल कानून के शासन को मजबूत कर रही है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी सुदृढ़ बना रही है कि प्रदेश में प्रत्येक निर्णय विधिसम्मत, निष्पक्ष और जनहित सर्वोपरि की भावना के साथ लिया जा रहा है।

सोम डिस्टिलरीज प्रकरण में लिया गया यह निर्णय प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज” नीति का एक सशक्त उदाहरण है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि मध्यप्रदेश में किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्रतिष्ठान को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा तथा नियमों के उल्लंघन, अवैध गतिविधियों और सार्वजनिक हित के प्रतिकूल आचरण के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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