Edited By Himansh sharma, Updated: 17 Jun, 2026 06:32 PM

मध्यप्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं।
भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं। प्रदेश सरकार ने महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया समय से पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को विहित प्राधिकारी घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत तथा महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है।
दरअसल, अप्रैल-मई 2027 में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए सरकार इस बार किसी भी प्रकार की देरी से बचना चाहती है। यही वजह है कि आरक्षण प्रक्रिया को समय रहते पूरा करने की कवायद अभी से शुरू कर दी गई है।
2022 के चुनावों से लिया गया सबक
प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव वर्ष 2019 में होने थे, लेकिन राजनीतिक बदलाव, कोरोना महामारी और ओबीसी आरक्षण को लेकर चले लंबे कानूनी विवाद के कारण चुनावों में काफी देरी हुई। मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। अंततः 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के साथ वर्ष 2022 में चुनाव संपन्न कराए गए थे। सरकार अब उसी तरह की किसी भी कानूनी या प्रशासनिक बाधा से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रही है।
लॉटरी से तय होंगी आरक्षित सीटें
नगरीय निकाय चुनावों में महापौर और अध्यक्ष पदों का आरक्षण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। इसमें सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों का निर्धारण किया जाएगा। प्रदेश के 16 नगर निगमों में कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, इसका फैसला लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।महिलाओं के लिए कुल पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित रहेगा, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में तय किया जाएगा। इसके बाद चक्रानुक्रम पद्धति से ओबीसी आरक्षण लागू होगा।
वर्तमान में नगर निगमों की आरक्षण स्थिति
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार इंदौर, जबलपुर, रीवा और सिंगरौली नगर निगम सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं। ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर और कटनी सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं। रतलाम और सतना ओबीसी वर्ग के लिए, जबकि भोपाल और खंडवा ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं। उज्जैन अनुसूचित जाति, मुरैना अनुसूचित जाति महिला और छिंदवाड़ा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है।
निर्वाचन आयोग ने भी तेज की तैयारी
दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी चुनावी तैयारियों को गति दे दी है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के आधार पर मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की उपलब्धता और आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।स्पष्ट संकेत हैं कि मध्यप्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों ही समयबद्ध तैयारी में जुट चुके हैं। आने वाले महीनों में आरक्षण और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाएं चुनावी माहौल को और गर्माने वाली हैं।