Edited By Himansh sharma, Updated: 27 Jun, 2026 04:04 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अपने पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अपने पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। माना जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद कैबिनेट में नए चेहरों को जगह दी जा सकती है, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव संभव है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल में बदलाव का सबसे बड़ा आधार मंत्रियों का प्रदर्शन और कामकाज होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से व्यापक चर्चा के बाद लिया जाएगा। सरकार लगातार मंत्रियों और विधायकों के कार्यों की समीक्षा कर रही है, ताकि बेहतर प्रदर्शन करने वालों को जिम्मेदारी और कमजोर प्रदर्शन करने वालों को संदेश दिया जा सके।
5 नए विधायकों को मिल सकती है मंत्री पद की जिम्मेदारी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस विस्तार में करीब पांच नए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इनमें महिला नेताओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है। रीति पाठक, मालिनी गौड़ और अर्चना चिटनीस के नाम प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही कुछ नए क्षेत्रीय चेहरों को भी अवसर देकर पार्टी संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।
बुंदेलखंड से लेकर OBC समीकरण तक पर फोकस
बीजेपी इस फेरबदल को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव और आगामी नगरीय निकाय चुनावों की रणनीति से जोड़कर देख रही है। लंबे समय से बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की चर्चा रही है। ऐसे में सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से किसी विधायक को मंत्री बनाकर क्षेत्रीय असंतोष कम करने की कोशिश की जा सकती है।इसके साथ ही पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर भी काम कर रही है। महिला मतदाताओं को साधने के लिए कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
तीन वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, केवल नए चेहरों को शामिल करने तक ही बदलाव सीमित नहीं रहेगा। सरकार तीन वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल कर सकती है। माना जा रहा है कि जिन विभागों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, वहां नई जिम्मेदारियां देकर प्रशासनिक गति बढ़ाने की तैयारी है।
संगठन और सरकार के बीच तालमेल पर रहेगा जोर
बीजेपी नेतृत्व चाहता है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय के साथ आगामी चुनावों की तैयारियां तेज हों। यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय, सामाजिक, महिला और संगठनात्मक संतुलन को प्राथमिकता दी जा सकती है। अब सभी की नजर मानसून सत्र के बाद होने वाले फैसले पर टिकी है, जो मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।