MP मंत्रिमंडल में इस दिग्गज की हो सकती है धमाकेदार वापसी! इन नेताओं के नाम की भी चर्चा

Edited By Himansh sharma, Updated: 25 Jun, 2026 04:03 PM

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मध्य प्रदेश की राजनीति में मानसून सत्र के बाद बड़े बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में मानसून सत्र के बाद बड़े बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में दिए गए परफॉर्मेंस आधारित मूल्यांकन के संकेतों ने मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की अटकलों को नई हवा दे दी है। सत्ता और संगठन के गलियारों में संभावित बदलावों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, वहीं कई नेताओं की नजर अब आगामी कैबिनेट विस्तार पर टिकी हुई है। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व आगामी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव कर सकता है। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है जहां पार्टी को संगठनात्मक मजबूती और जनसंतुलन की आवश्यकता महसूस हो रही है।

सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव की संभावित वापसी को लेकर है। बुंदेलखंड क्षेत्र में उनका प्रभाव और लंबा राजनीतिक अनुभव पार्टी के लिए अहम माना जाता है। सागर, दमोह और पन्ना सहित आसपास के जिलों में संगठन को और मजबूत करने के उद्देश्य से उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।

वहीं महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी भाजपा बड़ा कदम उठा सकती है। राजनीतिक हलकों में रीति पाठक, मालिनी गौड़ और अर्चना चिटनीस के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि इनमें से दो नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर पार्टी महिला नेतृत्व को मजबूत संदेश दे सकती है।

इसके अलावा युवा और सक्रिय चेहरों को मौका देने की रणनीति पर भी विचार चल रहा है। इस कड़ी में प्रदीप लारिया और बृजेंद्र प्रताप सिंह के नाम तेजी से उभरकर सामने आए हैं। दोनों नेताओं को संगठन और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और मुख्यमंत्री के हालिया संकेतों ने यह साफ कर दिया है कि मानसून सत्र के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा किन चेहरों पर भरोसा जताती है और किन नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव होता है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या मोहन यादव कैबिनेट में होगा बड़ा उलटफेर, या फिर पार्टी अनुभव और संतुलन के पुराने फार्मूले पर ही आगे बढ़ेगी?

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