कांग्रेस के अंदर कौन कर रहा था खेल? भाजपा के खुलासे से राजनीति गरमाई, प्रदेश अध्यक्ष के बयान से मचा सियासी भूचाल

Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Jun, 2026 07:24 PM

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मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर छिड़ा विवाद अब केवल कानूनी या चुनावी मुद्दा नहीं रह गया है

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर छिड़ा विवाद अब केवल कानूनी या चुनावी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर कथित अंदरूनी कलह और विश्वासघात की चर्चाओं तक पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा लगातार यह दावा कर रही है कि पूरी जानकारी उसे कांग्रेस के ही कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिल रही थी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के ताजा बयान ने इस बहस को और हवा दे दी है। बुधवार को मीडिया से बातचीत में खंडेलवाल ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि घर का भेदी लंका ढाए और भाजपा को समय-समय पर सारी महत्वपूर्ण जानकारी कांग्रेस के भीतर से ही मिलती रही। उनका दावा था कि आखिर भाजपा के पास दस्तावेज और सूचनाएं कहां से आईं, यह सवाल कांग्रेस को खुद से पूछना चाहिए।

भाजपा का दावा, कांग्रेस की चूक बनी संकट की वजह

खंडेलवाल ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए जाने वाले नामांकन पत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों में आवश्यक जानकारी देना उम्मीदवार और पार्टी की जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार यदि किसी मामले की जानकारी फॉर्म में दर्ज नहीं की गई, तो इसकी जवाबदेही कांग्रेस की है। भाजपा का कहना है कि नामांकन निरस्त होने की पूरी वजह कांग्रेस की लापरवाही या अंदरूनी गुटबाजी है, जबकि पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा को दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे संकेत

मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय भी पिछले दिनों में यह संकेत दे चुके हैं कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन से जुड़ी कई जानकारियां कांग्रेस के ही लोगों के माध्यम से भाजपा तक पहुंचीं। अब प्रदेशाध्यक्ष के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस के भीतर कोई ऐसा नेता या समूह था जिसने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया।

कांग्रेस की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के लगातार आरोपों के बावजूद कांग्रेस की ओर से अब तक कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के बड़े नेता सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बोलने से बच रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह चुप्पी कई नए सवाल खड़े कर रही है और भाजपा को हमलावर होने का मौका दे रही है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

नामांकन विवाद के बीच सोशल मीडिया पर भी कई तस्वीरें और दावे वायरल हो रहे हैं। भाजपा समर्थक कुछ तस्वीरों को आधार बनाकर कांग्रेस के भीतर कथित असंतोष और गुटबाजी की चर्चा कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

असली सवाल अब भी बरकरार

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों निरस्त हुआ, इसमें किसकी चूक थी और भाजपा तक संवेदनशील जानकारी कैसे पहुंची—ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना तय है कि भाजपा के ‘घर का भेदी’ वाले बयान ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर कांग्रेस का वह ‘विभीषण’ कौन है, जिसकी ओर भाजपा बार-बार इशारा कर रही है।

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