Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Jan, 2026 09:24 AM

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह ऐलान भीड़ के सामने किया गया।
रतलाम: जब पूरा देश गणतंत्र दिवस पर संविधान, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का जश्न मनाने की तैयारी में था, ठीक उससे एक रात पहले मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के ग्राम पंचेवा से सामने आया एक वीडियो लोकतंत्र की आत्मा को झकझोर देता है।
इस वीडियो में खुलेआम ऐलान किया जा रहा है कि अगर गांव का कोई लड़का या लड़की लव मैरिज करता है.. खासतौर पर जाति या परिवार की मर्जी के खिलाफ विवाह करता है—तो उसकी सजा केवल दंपती को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को भुगतनी होगी।
फरमान क्या है?
वीडियो में की गई घोषणा के मुताबिक— ऐसे परिवारों को दूध नहीं दिया जाएगा ,मजदूरी पर नहीं बुलाया जाएगा ,शादी-ब्याह, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों से बहिष्कार
गांव की बैठकों और फैसलों से बाहर
ग्रामीणों को उनसे मिलने-जुलने तक पर रोक यह सिर्फ सजा नहीं, बल्कि सामाजिक बहिष्कार के ज़रिए जीना नामुमकिन बनाने की धमकी है। भीड़ की खामोशी, सामूहिक सहमति का संकेत
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह ऐलान भीड़ के सामने किया गया। कई ग्रामीण वहां मौजूद थे, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया। यह चुप्पी बताती है कि मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भीड़ की मानसिकता और पंचायतनुमा तानाशाही का है।
बड़ा सवाल: संविधान या पंचायत?
भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट बार-बार कह चुका है कि
लव मैरिज अपराध नहीं सामाजिक बहिष्कार गैरकानूनी है
फिर सवाल उठता है
क्या गांव के ऐसे फरमान संविधान से ऊपर हैं? क्या लोकतांत्रिक भारत में आज भी ‘खाप मानसिकता’ जिंदा है?
चेतावनी नहीं, अपराध है यह
कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस तरह की घोषणाएं मानवाधिकार कानूनों का सीधा उल्लंघन हैं।