Edited By Himansh sharma, Updated: 19 Oct, 2026 12:45 PM
मध्यप्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ सकती है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ सकती है। इसके लिए दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाना है। इनमें से 13 अधिकारियों को IAS अवॉर्ड मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, शुरुआती सूची में शामिल चार अधिकारियों के नामों को लेकर विवाद सामने आने से चयन प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
यदि विवादित नामों पर सहमति नहीं बनती है या संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड के आधार पर उनका चयन नहीं होता, तो वरिष्ठता क्रम में आगे मौजूद अन्य अधिकारियों को मौका मिल सकता है। ऐसी स्थिति में संभावित चयन सूची का समीकरण बदल सकता है। चर्चा यह भी है कि वैकल्पिक नामों के शामिल होने पर चयनित अधिकारियों में महिला अफसरों की संख्या नौ तक पहुंच सकती है।
39 अधिकारियों के नामों पर होगा विचार
राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को IAS अवॉर्ड देने के लिए तैयार प्रस्तावित सूची में विभिन्न विभागों और जिलों में पदस्थ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें जयेंद्र कुमार विजयवत, मनोज मालवीय, कमल चंद्र नागर, मिनिषा पांडेय, इला तिवारी, सपना एम. लोवंशी, नीता राठौर, शैलेंद्र सिंह सोलंकी, रानी पासी, रंजना देवड़ा, माधवी नागेंद्र, वर्षा सोलंकी और प्रियंका गोयल के नाम प्रमुखता से शामिल बताए गए हैं।
इन अधिकारियों की वरिष्ठता के साथ उनकी सेवा संबंधी गोपनीय चरित्रावली (CR) भी चयन में अहम भूमिका निभाएगी। समिति सभी पात्र अधिकारियों के रिकॉर्ड का मूल्यांकन करने के बाद तय करेगी कि किन नामों को IAS अवॉर्ड के लिए उपयुक्त माना जाए।
चार नामों पर आपत्ति, चयन को लेकर बढ़ी चर्चा
प्रस्तावित सूची में शामिल कुछ अधिकारियों के नामों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने महीप किशोर तेजस्वी के नाम पर सवाल उठाए हैं। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सपना एम. लोवंशी के नाम को लेकर सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराया है।
हालांकि, इन आपत्तियों का अंतिम चयन पर क्या असर पड़ेगा, यह समिति के मूल्यांकन और संबंधित अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगा। केवल सार्वजनिक आपत्ति के आधार पर किसी अधिकारी का चयन रुकना तय नहीं माना जा सकता।
इन अधिकारियों को मिल सकता है मौका
यदि शुरुआती सूची में शामिल कुछ नाम चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाते हैं, तो वरिष्ठता क्रम के आधार पर दूसरे अधिकारियों के नामों पर विचार किया जा सकता है। इनमें हरदा जिला पंचायत के सीईओ नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, जीएडी (कार्मिक) में उप सचिव निमिषा जायसवाल और उज्जैन जिला पंचायत एवं विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप कुमार सोनी के नाम शामिल बताए गए हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि संभावित चयन में एक अधिकारी के लिए विशेष रूप से अवसर बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
वरिष्ठता के साथ मेरिट भी होगी अहम
IAS अवॉर्ड की प्रक्रिया में केवल वरिष्ठता ही निर्णायक नहीं होती। अधिकारियों की पिछले पांच वर्षों की CR और निर्धारित मूल्यांकन मानकों को भी ध्यान में रखा जाता है। इसी आधार पर अधिकारियों को आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड, गुड और अनफिट जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है। चयन में पहले उच्च श्रेणी के अधिकारियों पर विचार होता है और निर्धारित कोटा शेष रहने पर अगली श्रेणियों के नामों पर विचार किया जाता है।
यह प्रक्रिया सामान्य पदोन्नति से अलग मानी जाती है। किसी अधिकारी को एक बार अनफिट श्रेणी में रखे जाने का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में उसके चयन की संभावना हमेशा के लिए समाप्त हो गई। बाद की चयन प्रक्रिया में निर्धारित अवधि की नई सेवा प्रविष्टियों के आधार पर फिर मूल्यांकन किया जा सकता है। फिलहाल, मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में प्रस्तावित DPC बैठक और संभावित IAS चयन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अंतिम तस्वीर समिति के निर्णय और आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी।