Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Apr, 2026 04:39 PM

मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य से तीन सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस की एक सीट के लिए पार्टी के भीतर कई बड़े चेहरों के बीच दावेदारी को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है।सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि वे दोबारा राज्यसभा नहीं जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसके बाद उन्होंने अपने करीबी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का नाम आगे बढ़ाया है। दिग्विजय का तर्क है कि प्रदेश में कांग्रेस के पास मजबूत ब्राह्मण नेतृत्व की कमी है और शर्मा को मौका देने से पार्टी को सामाजिक संतुलन साधने में मदद मिलेगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली नेतृत्व की पसंद के तौर पर पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सहमति से उनका नाम आगे बढ़ सकता है।
वहीं, वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा भी राज्यसभा जाने की दौड़ में शामिल हैं। वे दलित वर्ग से आते हैं और पार्टी के भीतर सामाजिक समीकरण के आधार पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रहे हैं, हालांकि दिल्ली में मजबूत लॉबिंग का अभाव उनके लिए चुनौती बन सकता है।
राजनीतिक गणित ने बढ़ाई टेंशन
कांग्रेस के लिए यह चुनाव उतना आसान नहीं दिख रहा जितना आंकड़ों में नजर आता है। राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी हैं, जबकि कांग्रेस के पास तकनीकी रूप से पर्याप्त संख्या रही है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत तो मिली है, लेकिन वे मतदान नहीं कर पाएंगे। वहीं, दतिया विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट से सजा मिलने के बाद उनके वोट पर भी संशय बना हुआ है। इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी कांग्रेस के खाते में आता नहीं दिख रहा। ऐसे में कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर करीब 63 के आसपास रह गए हैं। यदि इनमें से कुछ वोटों में क्रॉस वोटिंग होती है, तो पार्टी के लिए अपनी तय मानी जा रही सीट भी खतरे में पड़ सकती है।
भाजपा की नजर तीसरी सीट पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस में टूट या क्रॉस वोटिंग हुई, तो भाजपा तीसरी सीट पर भी कब्जा जमा सकती है। पार्टी पहले भी अन्य राज्यों में ऐसे समीकरण बदलने में सफल रही है, जिससे कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है।
राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस के भीतर चल रही यह खींचतान अब सिर्फ नामों की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी की एकजुटता और रणनीति की भी बड़ी परीक्षा बनती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान किस चेहरे पर भरोसा जताता है और क्या कांग्रेस अपने आंकड़ों को सुरक्षित रख पाती है या नहीं।