मौत के बाद प्रमोशन,MP हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,कहा-अधिकार व्यक्ति के साथ खत्म नहीं होते

Edited By Desh Raj, Updated: 30 Mar, 2026 09:46 PM

officers and employees to receive promotions even after death high court

एमपी हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जो काफी अहम और ऐतिहासिक है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच के इस फैसले से राज्य में लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

(ग्वालियर): एमपी हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जो काफी अहम और ऐतिहासिक है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच के इस फैसले से राज्य में लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के अधिकार उसकी मृत्यु के साथ खत्म नहीं होते हैं। इस पर कोर्ट ने दुनिया सिधार चुके वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी राधाकृष्ण शर्मा को साल 2002 से प्रमोशन देने का आदेश दिया है। यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। ग्वालियर पीठ ने ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति के अधिकार उसकी मृत्यु के साथ खत्म नहीं होता है।

आखिर क्या था मामला?

दरअसल डॉ. राधाकृष्ण शर्मा कृषि विकास विभाग में वरिष्ठ अधिकारी थे। वर्ष 2002 में उनकी प्रमोशन होनी थी, लेकिन जब पदोन्नति की बारी आई तो उनके जूनियर अफसरो को प्रमोशन दे दिया गया।  शर्मा ने जब इसकी शिकायत कि तो विभाग ने कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है और साथ ही उनकी ACR भी संतोषजनक नहीं है।

इसके चलते उनका प्रमोशन को रोक दिया गया हैं। वहीं मामले में मोड़ तब आया जब  शर्मा कुछ  समय आपराधिक मामले से बरी हो गए लेकिन बरी होने के बाद भी विभाग ने उनका प्रमोशन नहीं किया। इसी के बाद से कानूनी लड़ाई शुरु हुई। प्रमोशन करने से मना किया तो साल 2008 में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।  लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे ने इस लड़ाई को लड़ना जारी रखा।

हाईकोर्ट ने विभाग के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर किसी भी कर्मचारी को विभाग की लापरवाही की वजह से उसका हक नहीं मिलता तो उसका पूरा नुकसान भरना होगा। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जानकारी दिए बिना किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की एसीआर को आधार बनाकर उसका प्रमोशन रोकना पूरी तरह गलत है।

फिर कोर्ट ने शर्मा के हक में फैसला देते हुए विभाग को आदेश दिया कि कि  डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को 28 अक्टूबर 2002 से पदोन्नत माना जाए और  इसके अलावा उस तारीख से मिलने वाले सभी वेतन, एरियर, लाभ भी परिवार को दिया जाए।  लिहाजा  हाईकोर्ट के इस एक फैसले ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और अधिकारीयों के एक बड़ी सौगात दी है।

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