MP के नगर परिषदों में एल्डरमैन की घोषणा: 25 जिलों के 123 परिषदों में 4-4 नियुक्ति

Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Mar, 2026 01:43 PM

mp alderman list out 123 councils get 4 each

मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्तियों का ऐलान हो गया है।

भोपाल: मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्तियों का ऐलान हो गया है। रविवार को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 25 जिलों की 123 नगर परिषदों के लिए एल्डरमैन की पहली सूची जारी कर दी। हर नगर परिषद में अधिकतम 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। यह नियुक्तियां मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 19 (1)(ग) के तहत की गई हैं। इनका कार्यकाल संबंधित नगर परिषद के कार्यकाल तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

किन क्षेत्रों की सूची अभी रुकी?

हालांकि चंबल और बुंदेलखंड अंचल की नगर परिषदों के लिए एल्डरमैन की सूची फिलहाल होल्ड पर रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक कई स्थानों पर नामों को लेकर सहमति नहीं बन पाई, जिसके चलते इन क्षेत्रों में घोषणा टाल दी गई है।

 किन जिलों में हुई नियुक्तियां?

पहली सूची में सागर, रीवा, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच सहित कुल 25 जिले शामिल हैं।

 एल्डरमैन की भूमिका क्या होगी?

एल्डरमैन परिषद की बैठकों में भाग लेकर सुझाव और मार्गदर्शन देंगे, लेकिन उनके पास वोटिंग का अधिकार नहीं होगा। इन्हें प्रशासनिक अनुभव के आधार पर नियुक्त किया जाता है ताकि परिषद के कामकाज को बेहतर बनाया जा सके।

 चुनावी रणनीति से जुड़ा फैसला

इस बार इन नियुक्तियों को सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी नगरीय निकाय चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकार की रणनीति के दो बड़े मकसद:

 लंबे समय से इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर संतुष्ट करना, अनुभवी नेताओं के जरिए स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों पर पकड़ मजबूत करना..

क्या है पूरा फॉर्मूला?

भाजपा संगठन में कई दौर की चर्चा के बाद तय किया गया कि छोटे कस्बों से लेकर बड़े नगर परिषदों तक एक समान फॉर्मूले के तहत 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएं। इसमें संगठन से जुड़े अनुभवी और सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता दी गई है।

 क्या संकेत मिल रहे हैं?

इन नियुक्तियों से साफ है कि सरकार अब निकाय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले समय में यह फैसला नगरीय राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!