Edited By Desh Raj, Updated: 20 Mar, 2026 02:52 PM

मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं लेकिन अब प्रदेश के एक बड़े अधिकारी के कारनामे सामने आए हैं। अब इस अधिकारी पर शिंकजा कसने की तैयारी शुरु हो गई है।
(भोपाल):मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं लेकिन अब प्रदेश के एक बड़े अधिकारी के कारनामे सामने आए हैं। अब इस अधिकारी पर शिंकजा कसने की तैयारी शुरु हो गई है। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय भोपाल जोनल ऑफिस की टीम ने आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे के खिलाफ कार्रवाई शुरु कर दी है। सरवटे पर कई जिलों में संपत्तियां खरीदने का आरोप है और करोड़ों रुपये की अवैध आय के आरोप हैं। सरवटे के खिलाफ शुरु हुई इस कार्रवाई से प्रदेश में हड़कंप है।
पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे पर कसेगा शिकंजा
दरअसल आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे अब भ्रष्टाचार के केस में घिरते हुए नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय भोपाल ने उनकी अवैध संपति के को लेकर घेराबंदी शुरु कर दी है। अब सरवटे पर शिंकजा कसना तय है। उसके खिलाफ कोर्ट में केस प्रस्तुत कर दिया गया है। सरवटे पर अवैध कमाई से कई जिलों में संपत्तियां खरीदने का आरोप है । डिप्टी डायरेक्टर के खिलाफ भोपाल ED ने कोर्ट में अभियोजन पेश किया है। सरवटे पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करके अभियोजन शिकायत प्रस्तुत की है।
आपको बता दें कि जगदीश प्रसाद सरवटे के खिलाफ भ्रष्टाचार की कई शिकायतें थीं। ईडी की जांच में यह सामने आया है कि भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की। जांच के दौरान आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे के भ्रष्टाचार की तमाम परतें खुलती चलीं गईं।
इसके साथ ही आरोप है कि सरवटे ने भ्रष्टाचार से कमाए करोड़ों रुपए से प्रदेश भर में कई संपत्तियां खरीदी। जांच में पता चला कि भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी सहित कई जिलों में संपत्ति खरीदकर कमाई को खपाने की कोशिश की गई।
ईडी की जांच के दौरान कुल 11.81 करोड़ की अवैध आय की पहचान हुई। कई अवैध संपत्तियों को कुर्क भी कर लिया गया है। आपको बता दें कि ईडी ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में दर्ज FIR के आधार पर सरवटे के खिलाफ जांच शुरू की थी।
सरवटे आदिम जाति कल्याण विभाग जबलपुर के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर थे। ईडी ने जबलपुर के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इस एफआईआर में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं।