Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Mar, 2026 01:44 PM

मध्यप्रदेश के कई जिलों में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर की कमी से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भोपाल: मध्यप्रदेश के कई जिलों में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर की कमी से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायसेन, जबलपुर, ग्वालियर ,कटनी और नरसिंहपुर समेत कई जगहों से सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। स्थिति यह है कि लोगों को गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है।
रायसेन में केवल दो दिन का स्टॉक
रायसेन जिले में एलपीजी सिलेंडर का स्टॉक तेजी से घट रहा है। यहां कई गैस एजेंसियों के पास सिर्फ दो दिन का ही स्टॉक बचा बताया जा रहा है। इसी वजह से उपभोक्ता सुबह से ही एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर सिलेंडर लेने का इंतजार कर रहे हैं।
जबलपुर में कमर्शियल सिलेंडरों की डिलीवरी प्रभावित
जबलपुर में व्यावसायिक यानी कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी पर एजेंसियों द्वारा अघोषित रोक लगा दी गई है। इससे होटल, ढाबा और छोटे व्यापारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कटनी में बुकिंग पोर्टल बंद
कटनी जिले में गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग का पोर्टल बंद होने से उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है। बुकिंग नहीं होने के कारण लोग सीधे एजेंसियों पर पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं, जिससे वहां भीड़ बढ़ती जा रही है।
नरसिंहपुर में लैंडलाइन नंबर भी बंद
नरसिंहपुर में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। यहां कई एजेंसी संचालकों ने बुकिंग के लिए दिए गए लैंडलाइन नंबर ही बंद कर दिए हैं। इससे उपभोक्ताओं को गैस बुक कराने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं की मांग – पारदर्शिता और निगरानी
गैस की कमी से परेशान उपभोक्ताओं ने प्रशासन से व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि हर गैस एजेंसी को रोजाना की बुकिंग और उपलब्ध स्टॉक की जानकारी नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही हर एजेंसी और उसके गोदाम पर एक जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति कर उसका मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किया जाए।
उपभोक्ताओं ने यह भी सुझाव दिया है कि गाइडलाइन के अनुसार उन लोगों को प्राथमिकता से सिलेंडर दिया जाए जिन्होंने लंबे समय से गैस नहीं ली है लेकिन बुकिंग करा रखी है। इसके अलावा हर एजेंसी पर शिकायत सुनने के लिए अलग अधिकारी नियुक्त करने की मांग भी की जा रही है। लगातार बढ़ती परेशानी के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई है।