Edited By Vikas Tiwari, Updated: 17 Mar, 2026 06:18 PM

मध्यप्रदेश के Ratlam में मंगलवार को एक आंदोलन ने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी। 10 मिनट की मुलाकात के लिए शुरू हुए इस विवाद ने ऐसा रूप ले लिया कि आम जनता को 40 डिग्री की तपती धूप में करीब 4 घंटे तक सड़कों पर जाम में फंसे रहना पड़ा।
रतलाम (समीर खान): मध्यप्रदेश के Ratlam में मंगलवार को एक आंदोलन ने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी। 10 मिनट की मुलाकात के लिए शुरू हुए इस विवाद ने ऐसा रूप ले लिया कि आम जनता को 40 डिग्री की तपती धूप में करीब 4 घंटे तक सड़कों पर जाम में फंसे रहना पड़ा।

खनिज विभाग की कार्रवाई के विरोध में Jeevansingh Sherpur ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान किया था। हालांकि रतलाम पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने उन्हें सेजावता और धोसीगांव के पास रोक दिया, जिसके चलते सड़क पर लंबा जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर Misha Singh को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। उनका आरोप था कि प्रशासन जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है, जबकि आम लोग भीषण गर्मी में परेशान हो रहे हैं। शहर के एंट्री पॉइंट और महू-नीमच फोरलेन पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बैरिकेडिंग के कारण कई मार्ग बंद रहे, जिससे लोगों को अपने घर पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि यह विवाद 7 दिन पहले जावरा क्षेत्र में डंपर जब्ती की कार्रवाई से शुरू हुआ था। खनिज विभाग द्वारा दो डंपरों को अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किए जाने के बाद शेरपुर ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।
प्रदर्शन के दौरान अवैध उत्खनन पर कार्रवाई रोकने, किसानों की समस्याओं के समाधान, गेहूं खरीदी, कर्ज अदायगी और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर 11 प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखी गई हैं। फिलहाल प्रशासन स्थिति को संभालने में जुटा है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एक आंदोलन के चलते आम जनता को इतनी बड़ी परेशानी क्यों झेलनी पड़ी।