Edited By meena, Updated: 21 Jan, 2026 05:37 PM

पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानून और जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली वर्दी इस बार खुद कटघरे में नजर आई है...
रीवा (गोविंद सिंह) : पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानून और जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली वर्दी इस बार खुद कटघरे में नजर आई है। रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में सिविल लाइन थाने में पदस्थ आरक्षक पंकज मिश्रा को पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, 112 वाहन में तैनात आरक्षक पंकज मिश्रा पर नशीली कफ सिरप के एक आरोपी को छोड़ने के नाम पर 3 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। इतना ही नहीं, आरोपी का मोबाइल छुड़ाने और ट्रैकिंग से बचाने के नाम पर अतिरिक्त डेढ़ लाख रुपये वसूले जाने के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ढेकहा निवासी रवि दहिया, जो कोरेक्स बेचने के मामले में फरार चल रहा था, उसे आरक्षक पंकज मिश्रा ने निजी अस्पताल के पास से उठाया। इसके बाद आरोपी को एक निजी होटल में ले जाकर नकद रिश्वत ली गई। पूरा लेन-देन बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया।

मामला तब उजागर हुआ जब इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंची। रीवा एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक सेल से गोपनीय जांच करवाई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए और रिश्वत लेने की पुष्टि भी हुई।
इसके बाद आरक्षक पंकज मिश्रा को तत्काल निलंबित कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। यह कार्रवाई सिर्फ एक आरक्षक पर नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर उठते उन सवालों का प्रतीक है, जिनमें वर्दी की साख दांव पर लगती नजर आती है। सवाल यह है कि जब कानून के रक्षक ही सौदेबाजी पर उतर आएं, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे?