घड़ियाली आंसू बहा रहे शिवराज-कार्तिकेय…', कोसमी कांड पर पूर्व अधिकारी ने कह दी इतनी बड़ी बात!

Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Oct, 2026 03:23 PM

shivraj kartikeya face sharp attack over kosmi case

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है।

भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। वन विभाग की कार्रवाई को लेकर जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताते हुए प्रभावित परिवारों के समर्थन में आवाज उठाई है, वहीं अब पूर्व भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी आजाद सिंह डबास ने इस पूरे विवाद पर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने वन विभाग की कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बताते हुए शिवराज सिंह चौहान, उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान और स्थानीय विधायक रमाकांत भार्गव पर मामले को राजनीतिक रंग देने के आरोप लगाए हैं।

पूर्व अधिकारी के बयान के बाद कोसमी का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब विवाद केवल वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और मकानों को हटाने तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि नेताओं के बयानों और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

2021 में प्लांटेशन का हवाला देकर किया अतिक्रमण का दावा

पूर्व IFS अधिकारी आजाद सिंह डबास ने अपने वीडियो में दावा किया कि जिस क्षेत्र में वन विभाग ने कार्रवाई की, वहां वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले सामने आए थे। उनके अनुसार, वर्ष 2021 में वन विकास निगम ने संबंधित क्षेत्र में प्लांटेशन कराया था। उस समय वहां अतिक्रमण नहीं होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि बाद में लगभग 36 हेक्टेयर जमीन पर 12 परिवारों के मकान बनाए गए।

डबास के मुताबिक, इन परिवारों में 10 आदिवासी और दो अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवार शामिल हैं। उन्होंने कुछ परिवारों के पास दूसरे स्थान पर पक्के मकान होने की बात भी कही। एक व्यक्ति के हाल ही में कार खरीदने का दावा करते हुए उन्होंने अतिक्रमण के मामलों की जांच और संबंधित तथ्यों पर ध्यान देने की बात उठाई।

हालांकि, जमीन के स्वामित्व, कथित अतिक्रमण और प्रभावित परिवारों की स्थिति से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इन आरोपों के आधार पर संबंधित परिवारों की कानूनी स्थिति को अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता।

शिवराज और कार्तिकेय पर राजनीति करने का आरोप

आजाद सिंह डबास ने शिवराज सिंह चौहान और कार्तिकेय सिंह चौहान के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में राजनीतिक सहानुभूति दिखाई जा रही है। उन्होंने दोनों नेताओं और विधायक रमाकांत भार्गव के विरोध प्रदर्शन को घड़ियाली आंसू बताते हुए वन विभाग की कार्रवाई का बचाव किया।

पूर्व अधिकारी ने शिवराज सिंह चौहान की ओर से वन विभाग के कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल किए गए ‘नरपिशाच’ शब्द पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कार्तिकेय सिंह चौहान किस हैसियत से धरने पर बैठे थे। डबास ने दोनों नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की मांग भी की। ये सभी बातें पूर्व अधिकारी के आरोप और विचार हैं। इन पर संबंधित पक्षों का जवाब तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम का निष्पक्ष आकलन किया जा सकता है।

आदिवासी बच्चियों से मारपीट के आरोप पर भी उठाए सवाल

इस विवाद में कार्तिकेय सिंह चौहान की ओर से वन विभाग की टीम पर आदिवासी बच्चियों के साथ मारपीट किए जाने के आरोप का भी जिक्र सामने आया है। पूर्व IFS अधिकारी डबास ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया। हालांकि, घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, यह स्पष्ट करने के लिए प्रभावित परिवारों के बयान, प्रशासन का पक्ष और किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

मामले में एक ओर वन विभाग की कार्रवाई को अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर प्रभावित परिवारों के घर और फसलें नष्ट होने से उनके सामने पैदा हुई परेशानियों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

क्या है कोसमी गांव का पूरा विवाद?

जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर की रात सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में प्रशासन और वन विकास निगम की टीम ने कार्रवाई की थी। इस दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के रहने और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर सवाल उठने लगे।

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ी और मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होने की बात कही थी। उन्होंने इस विषय को मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाने की भी बात कही।

अब पूर्व IFS अधिकारी आजाद सिंह डबास ने वन विभाग का पक्ष लेते हुए नेताओं पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में कोसमी का विवाद दो अलग-अलग दावों के बीच उलझता दिखाई दे रहा है। एक तरफ वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का बचाव किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और उनके साथ हुए कथित व्यवहार पर सवाल उठ रहे हैं।

इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या थी, कार्रवाई किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर की गई और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए पर्याप्त अवसर दिया गया था या नहीं। इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!