Edited By Vikas Tiwari, Updated: 09 Apr, 2026 07:54 PM

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में चल रही तीन अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाएं किसानों की समृद्धि और राज्य के समग्र विकास का आधार बन रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर किसानों के खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचेगा,...
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में चल रही तीन अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाएं किसानों की समृद्धि और राज्य के समग्र विकास का आधार बन रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर किसानों के खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचेगा, जिससे वे साल में तीन फसलें लेने में सक्षम होंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ मिलकर तीन बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। इनमें केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना और मेगा तापी रीचार्ज परियोजना शामिल हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना है, जिसकी कुल लागत 44,604 करोड़ रुपये है। इससे मध्यप्रदेश में 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी, 41 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा और 103 मेगावाट बिजली उत्पादन भी होगा। वहीं पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों की 6.15 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस परियोजना से करीब 43 लाख लोगों को पेयजल और उद्योगों को भी पानी उपलब्ध होगा। इसके अलावा मेगा तापी रीचार्ज परियोजना के माध्यम से भू-जल स्तर बढ़ाने का कार्य किया जाएगा, जिससे बुरहानपुर और खंडवा जिलों में 1.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं की खास बात यह है कि इनकी लागत का लगभग 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। वर्तमान में प्रदेश का सिंचित रकबा 55 लाख हेक्टेयर है, जिसे वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रो सिंचाई के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव हो रही है और हर खेत तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य साकार हो रहा है।