Edited By meena, Updated: 08 Oct, 2026 08:51 PM

प्रधान आरक्षक के भाई ने कहा, 'इससे उसकी सोच और परवरिश पर सवाल उठते हैं और पता चलता है कि वह किस तरह का इंसान है।' पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश से जुड़े एक अलग मामले में दोषी ठहराए जाने...
सूरजपुर (चंचल सिंह) : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की एक त्वरित अदालत ने एक पुलिसकर्मी की पत्नी और उसकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के आरोप में बृहस्पतिवार को तीन लोगों को मौत की सजा और एक अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई। सरकारी वकील ने यह जानकारी दी। सरकारी वकील सुरेश शर्मा ने बताया कि जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने इस मामले के सभी चार आरोपियों को दोषी ठहराया है तथा कुलदीप साहू (32), चंद्रकांत चौधरी (28) और फूल सिंह उर्फ रिंकू (28) को मौत की सजा सुनाई है। वहीं एक अन्य आरोपी, आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20) को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2024 को कुख्यात बदमाश साहू ने चौधरी, विश्वकर्मा और सिंह की मदद से सूरजपुर शहर में एक पुलिस प्रधान आरक्षक की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी वर्षीय बेटी की हत्या कर दी थी। शर्मा ने बताया कि उन्होंने अदालत में दलील दी कि महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उनकी हत्या कर दी गई। महिला के शरीर पर चोट के 33 निशान और बच्ची के शरीर पर 28 निशान पाए गए थे। उन्होंने बताया कि आरोपियों के कपड़ों पर खून मिला था और सुनवाई के दौरान इस सबूत को चुनौती नहीं दी गई और इसी तरह कुलदीप साहू से जुड़े 'फिंगरप्रिंट' सबूत को भी चुनौती नहीं दी गई।
शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मी की पत्नी के साथ यौन उत्पीड़न ने अपराध की गंभीरता को और बढ़ा दिया। प्रधान आरक्षक के बड़े भाई अमित (बदला हुआ नाम) ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, ''यह एक अच्छा फैसला है। हमें ऐसे ही फैसले की उम्मीद थी। यह फैसला हमें दुख से उबरने में मदद करेगा। हमारे परिवार ने बहुत कुछ सहा है। हम इस फैसले से संतुष्ट हैं।'' अमित ने कहा कि उनका भाई इस घटना से पूरी तरह टूट गया था और मुश्किल समय में पुलिस विभाग ने उसका साथ दिया और उसका हौसला बढ़ाया। पिछले महीने अदालत के बाहर मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाने से जुड़े साहू के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित ने कहा कि इतने गंभीर अपराध के बावजूद आरोपी को कोई पछतावा नहीं था।
प्रधान आरक्षक के भाई ने कहा, ''इससे उसकी सोच और परवरिश पर सवाल उठते हैं और पता चलता है कि वह किस तरह का इंसान है।'' पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश से जुड़े एक अलग मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद साहू को सूरजपुर जिला अदालत से बाहर निकलते समय मुस्कुराते हुए देखा गया था। उसने मीडियाकर्मियों से उस तस्वीर का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा था जिसमें वह मुस्कुरा रहा है।
पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर 2024 की रात, साहू ने सबसे पहले एक आरक्षक घनश्याम सोनी पर गर्म तेल फेंका, जो दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के रास्ते पर तैनात थे। पुलिस ने बताया कि घटना के समय एनएसयूआई की सूरजपुर जिला इकाई के तत्कालीन अध्यक्ष चौधरी भी विश्वकर्मा और सिंह के साथ मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद, प्रधान आरक्षक और सूरजपुर पुलिस थाना के अन्य कर्मियों ने साहू को पकड़ने के लिए एक अभियान शुरू किया। पुलिस ने बताया कि जब पुलिसकर्मियों ने उसे ढूंढ लिया और गिरफ्तार करने की कोशिश की, तब आरोपी ने कथित तौर पर उन पर कार चढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि इसके बाद साहू मौके से भाग गया और प्रधान आरक्षक के घर में घुस गया, जहां उसने उनकी पत्नी और बेटी पर हमला किया। पुलिस ने बताया कि अपने साथियों की मदद से साहू ने महिला का यौन उत्पीड़न किया और फिर मां-बेटी की हत्या कर दी। बाद में आरोपी ने उनके शवों को उनके घर से लगभग चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव में फेंक दिया।