गर्भवती पत्नी ने अश्लील वीडियो शूट करने से रोका तो हैवान बना पति, बेरहमी से की हत्या, अब कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

Edited By meena, Updated: 02 Oct, 2026 02:54 PM

husband turns into a monster after wife stops him from shooting an obscene

पति पर आरोप है कि वह बैडरूम में अपनी पत्नी की अश्लील वीडियो शूट कर रहा था, पत्नी ने इसका विरोध किया तो पति हैवानियत पर उतर आया और उसने अपनी पत्नी की जान ले ली...

भिंड : अपनी पत्नी की जान लेने वाले एक पति को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पति पर आरोप है कि वह बैडरूम में अपनी पत्नी की अश्लील वीडियो शूट कर रहा था, पत्नी ने इसका विरोध किया तो पति हैवानियत पर उतर आया और उसने अपनी पत्नी की जान ले ली। मामले में अब तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी पति जबर सिंह दोहरे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन की ओर से मामले में 15 गवाहों के बयान कराए गए और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने फैसला सुनाया।

ये है पूरा मामला अनुसार मामला 26 जून 2025 का है। मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के ग्राम पुलेह का पुरा में आरोपी ने पत्नी डोली की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने अपने पिता भारत सिंह को हत्या करने की बात बताई थी। भारत सिंह ने ऊमरी थाने पहुंचकर पुलिस को घटना की सूचना दी और डोली के मायके वालों को भी फोन से जानकारी दी। डोली के पिता ने थाने पहुंचकर जबर सिंह और उसके पिता भारत सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 135/2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने डोली के मायके वालों सहित अन्य लोगों के बयान दर्ज किए।

जांच में सामने आया कि डोली की शादी जबर सिंह से 10 फरवरी 2025 को हुई थी। पुलिस ने शादी का कार्ड भी जब्त किया था। आरोपी का मोबाइल जब्त कर उसकी जांच की गई। अभियोजन के मुताबिक मोबाइल में 25 जून की रात का एक वीडियो मिला, जिसमें आरोपी अपनी पत्नी का आपत्तिजनक वीडियो बनाने का प्रयास कर रहा था और डोली उसे रोक रही थी। इसी दौरान पति ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। पोस्टमाटर्म रिपोर्ट में डोली के चार माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई।

न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए जबर सिंह को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी माना और आजीवन कारावास तथा पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। प्रकरण में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक उत्तम सिंह राजपूत ने पैरवी की। 

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