Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Sep, 2026 03:00 PM

करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन उज्जैन-गरोठ और उज्जैन-बदनावर फोरलेन नेशनल हाईवे के निर्माण में कथित अनियमितताओं का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है।
उज्जैन। (विशाल सिंह): करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन उज्जैन-गरोठ और उज्जैन-बदनावर फोरलेन नेशनल हाईवे के निर्माण में कथित अनियमितताओं का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। उज्जैन-आलोट सांसद अनिल फिरोजिया ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर दोनों परियोजनाओं के निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
सांसद ने केंद्रीय मंत्री के सामने हाईवे के विभिन्न हिस्सों में निर्माण गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही शिकायतों और तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाया। खास तौर पर उज्जैन-गरोठ मार्ग पर प्रेमनगर रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड और रिटेनिंग वॉल के क्षतिग्रस्त होने का मामला प्रमुखता से रखा गया।
बताया जा रहा है कि प्रेमनगर रेलवे ओवरब्रिज का यह हिस्सा करीब सात महीने के भीतर तीन बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। बार-बार सड़क और रिटेनिंग वॉल के प्रभावित होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी डिजाइन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी स्तर पर भी जांच कराई गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम ने मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान फाउंडेशन, बैकफिलिंग और ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ी कुछ खामियां सामने आने की बात कही गई है।
इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने क्षतिग्रस्त करीब 500 मीटर हिस्से के पुनर्निर्माण का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक इस पुनर्निर्माण का खर्च संबंधित ठेकेदार कंपनी को ही वहन करना होगा। निर्माण कार्य को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्थानीय स्तर पर भी निर्माण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि हाईवे के ऊंचे हिस्से में बैकफिलिंग के दौरान निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया गया। उनका कहना है कि बारिश के दौरान मिट्टी खिसकने से रिटेनिंग वॉल और RE ब्लॉक्स प्रभावित हुए, जिसके कारण सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ।
इसी बीच निर्माण एजेंसी के एक इंजीनियर की ओर से सामने आए वीडियो को AI-generated बताए जाने के दावे को लेकर भी विवाद सामने आया है। सांसद अनिल फिरोजिया ने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण किया और इसके बाद ही केंद्रीय मंत्री के समक्ष पूरे मामले को उठाया है।
अब पूरे मामले की तकनीकी जांच पर नजर बनी हुई है। जांच में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, डिजाइन, फाउंडेशन, बैकफिलिंग और ड्रेनेज व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण में वास्तविक तकनीकी खामी या लापरवाही कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।