13 साल बाद आया फैसला: बाबा रामदेव के काफिले पर पथराव के मामले में 11 आरोपी बरी, दो की हो चुकी है मौत

Edited By meena, Updated: 07 Oct, 2025 12:30 PM

11 accused acquitted in the stone pelting case on baba ramdev s convoy two dead

बाबा रामदेव के काफिले पर वर्ष 2012 में हुए पथराव के मामले में विशेष न्यायालय ने 13 साल बाद अहम फैसला सुना...

भोपाल (इजहार खान) : बाबा रामदेव के काफिले पर वर्ष 2012 में हुए पथराव के मामले में विशेष न्यायालय ने 13 साल बाद अहम फैसला सुनाते हुए 11 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश तथागत यागनिक की अदालत में हुई, जहां सबूतों के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।

यह घटना 19 जुलाई 2012 की है, जब योगगुरु बाबा रामदेव का काफिला भोपाल के अयोध्या नगर थाना क्षेत्र से गुजर रहा था। उसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने काफिले को रोकने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें हटाया, जिसके बाद कथित रूप से काफिले पर पथराव हुआ। इस घटना में एक कार का शीशा टूटने और कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।

पुलिस ने मामले में ईश्वर सिंह, सुनील पाठक, जगदीश कुमार, विभा पटेल, राज सिंह, गोविंद गोयल, सुनील सूद, जोधाराम गुर्जर, अनिल अहिरवार, अशोक सिंह, योगेश पुरी, मनीष यादव, मानिक अग्रवाल और कैलाश मिश्रा को आरोपी बनाया था। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संजय गुप्ता ने पैरवी की।

सबूत नहीं जुटा पाई पुलिस, कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस वाहन का शीशा टूटने की बात कही गई थी, उसका न तो फोटो कोर्ट में प्रस्तुत किया गया और न ही टूटा हुआ कांच जब्त किया गया। कोर्ट ने यह कहते हुए फैसला सुनाया कि आरोपियों द्वारा पथराव किए जाने की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। लिहाजा, सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

ट्रायल के दौरान दो आरोपियों की मौत, एक अब भी फरार

13 वर्षों तक चले इस केस के ट्रायल के दौरान दो आरोपियों कांग्रेस नेता ईश्वर सिंह चौहान और सुनील पाठक का निधन हो चुका है। कोर्ट ने उन्हें मृत मानते हुए शेष आरोपियों पर फैसला सुनाया। वहीं, एक अन्य आरोपी जगदीश कुमार की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। पुलिस द्वारा उसे अब भी फरार घोषित किया गया है ।यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में देरी और सबूतों के सही तरीके से संकलन न होने की वजह से वर्षों तक लटका रहा, जिससे अंततः अधिकतर आरोपियों को रिहाई मिल गई।

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