Edited By Vikas Tiwari, Updated: 18 Jan, 2026 07:37 PM

छत्तीसगढ़ ने शिक्षा प्रशासन में डिजिटल सुशासन का एक सशक्त और अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (IBITF) ने राज्य के विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा क्षेत्र में...
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): छत्तीसगढ़ ने शिक्षा प्रशासन में डिजिटल सुशासन का एक सशक्त और अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (IBITF) ने राज्य के विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए इसे राष्ट्रीय मानक के रूप में सराहा है।
आईबीआईटीएफ के अनुसार, विद्या समीक्षा केंद्र पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में छत्तीसगढ़ की ठोस उपलब्धि को दर्शाता है। यह केंद्र छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा क्रियान्वित एक अभिनव डिजिटल पहल है, जो शिक्षा व्यवस्था में डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन करता है, जिसमें 48,500 से अधिक शासकीय विद्यालय, 39 लाख से ज्यादा विद्यार्थी और लगभग 1.8 लाख शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल हैं। इतने बड़े तंत्र में पहले डेटा बिखराव, रियल-टाइम निगरानी की कमी और निर्णयों में देरी जैसी चुनौतियां सामने आती थीं। विद्या समीक्षा केंद्र ने इन चुनौतियों का समाधान एक केंद्रीकृत, रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म के रूप में किया है।
विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से UDISE, HRMIS, पीएम पोषण, PGI, APAAR ID, आधार और जीआईएस मैपिंग जैसे प्रमुख डेटाबेस का एकीकृत उपयोग हो रहा है। इससे विद्यालय अधोसंरचना, शिक्षक तैनाती, छात्र उपस्थिति, अधिगम परिणाम और शैक्षणिक योजनाओं की सतत एवं समग्र निगरानी संभव हुई है। एआई-आधारित एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव मॉडल के जरिए संभावित ड्रॉपआउट और अधिगम अंतराल की समय रहते पहचान की जा रही है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और समान अवसरों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।
इस डिजिटल पहल की उपलब्धियां इसकी प्रभावशीलता को दर्शाती हैं। अब तक लगभग 87 प्रतिशत विद्यार्थियों के लिए APAAR ID का सृजन, करीब 89 प्रतिशत आधार सत्यापन और 2.13 करोड़ से अधिक पाठ्यपुस्तकों की बारकोड-आधारित ट्रैकिंग की जा चुकी है, जिससे अनुमानित 50 करोड़ रुपये की बचत संभव हुई है। विद्या समीक्षा केंद्र को एक समर्पित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और सक्रिय कॉल सेंटर का सहयोग प्राप्त है, जिससे शिकायत निवारण, डेटा सत्यापन और फील्ड-लेवल फीडबैक की प्रक्रिया मजबूत हुई है। इससे शासन और नागरिकों के बीच विश्वास और सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आईबीआईटीएफ ने इसे डेटा-आधारित शासन संस्कृति को स्थापित करने वाला प्रभावी मॉडल बताते हुए कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से शिक्षा प्रशासन अधिक प्रो-एक्टिव, पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित स्वरूप में विकसित हुआ है। एनएम-आईसीपीएस मिशन के अंतर्गत स्थापित टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब के रूप में आईबीआईटीएफ ने इसे डेटा-ड्रिवन शिक्षा सुधार और टेक्नोलॉजी-सक्षम सुशासन का राष्ट्रीय मानक बताया है।