छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 12 मासूमों की मौत के जागी सरकार, SIT की जांच शुरू, CM ने किया ये बड़ा ऐलान

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 05 Oct, 2025 12:32 PM

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किडनी फेल होने से मासूम बच्चों की मौत के दर्दनाक मामले में अब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी परासिया बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत के आधार पर हुई है। आरोपी डॉक्टर को आज अदालत में पेश...

छिंदवाड़ा (साहुल सिंह): छिंदवाड़ा में लगातार 12 बच्चों की मौतों के बाद सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले पर SIT की जांच शुरू कर दी गई है। इस बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही पुलिस ने डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी परासिया बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत के आधार पर हुई है। आरोपी डॉक्टर को आज अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में है ताकि दवा आपूर्ति और इलाज से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा सके।

SP का बड़ा बयान आया सामने...
एसपी अजय पांडेय ने बताया कि शिकायत के आधार पर तमिलनाडु के श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स (कांचीपुरम) कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। कंपनी पर BNS की धारा “Adulteration of Drug” और “Culpable Homicide” (मानव वध) सहित Drugs & Cosmetics Act के तहत केस दर्ज किया गया है। इन धाराओं में दोषी पाए जाने पर 1 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इस बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

एक महीने में 12 मासूमों की मौत
बीते एक महीने में परासिया क्षेत्र में 12 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। बताया गया कि ये सभी बच्चे डॉ. प्रवीण सोनी के यहां सर्दी, खांसी और बुखार के इलाज के लिए पहुंचे थे। इलाज के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ती चली गई और किडनी फेलियर के लक्षण सामने आए। गंभीर हालत में बच्चों को नागपुर अस्पताल रेफर किया गया, जहां 12 मासूमों ने दम तोड़ दिया। इनमें से अधिकतर बच्चे 1 से 4 साल की उम्र के थे।

जांच के दायरे में और डॉक्टर
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिर्फ डॉ. प्रवीण ही नहीं, बल्कि परासिया क्षेत्र के कुछ अन्य डॉक्टर भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन डॉक्टरों के इलाज से कितने बच्चे बीमार हुए और कितनी मौतें हुईं। राज्य सरकार ने पहले ही इस पूरे मामले में SIT जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि दवा सप्लाई चैन, डॉक्टरों की भूमिका और फार्मा कंपनियों की जिम्मेदारी की गहराई से जांच की जा सके। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा गुणवत्ता निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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