Edited By Desh Raj, Updated: 11 Apr, 2026 06:02 PM

आज के दौर में गालियां देना और बदतमीजी से बात करना दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। खासकर आज की युवा पीढ़ी अपशब्दों को बोलने में खुद को कूल समझने लगी है। धीरे-धीरे गालियां और अपशब्द सामान्य बोलचाल का हिस्सा बनते जा रहें है।
बुरहानपुर (राजू सिंह राठौर):आज के दौर में गालियां देना और बदतमीजी से बात करना दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। खासकर आज की युवा पीढ़ी अपशब्दों को बोलने में खुद को कूल समझने लगी है। धीरे-धीरे गालियां और अपशब्द सामान्य बोलचाल का हिस्सा बनते जा रहें है। मध्य प्रदेश के जिला बुरहानपुर से एक नई शुरुआत हुई है। ऐसे प्रचलन और गलत परंपरा पर नकेल कसने के लिए इस जिले से एक नया अध्याय लिखा गया है।
बोरसर गांव में नया नियम लागू
दरअसल बुरहानपुर के बोरसर गांव में एक नया नियम लागू किया गया है, इस नियम के तहत किसी भी तरह की गाली और अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर 500 रुपए का जुर्माना तय किया गया है। या फिर एक घंटे की गांव में सफाई करनी होगी। यह फैसला ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके लिया है। यहीं नहीं इस नियम को लेकर पालन करने और जानकारी देने के लिए पूरे गांव में पोस्टर लगाए गए हैं।
गालीबाज को 500 रुपये का जुर्माना या फिर एक घंटे तक गांव की सफाई का फरमान
दरअसल ग्राम पंचायत ने बोरसर गांव को ‘गाली-मुक्त’ घोषित कर दिया गया है। खासकर मां-बहन की गालियां देने वाले आदमी को या तो 500 रुपये का जुर्माना अदा करना होगा या फिर उसे एक घंटे तक गांव की सफाई करनी होगी। गांव में जगह-जगह पोस्टर-बैनर लगाए गए हैं जिसमें बोरसर को ‘मध्यप्रदेश का पहला गाली-मुक्त गांव’ बताया गया है।
पहल का दिखने लगा है सकारात्मक परिणाम
दरअसल इस पहल का मकसद गांव में लोगों के व्यवहार को नियंत्रित करना और विवादों को सुलझाना है। इस पहल के बारे में बताते हुए उप सरपंच का कहना है कि गांव मे बच्चे और बड़े अपशब्दों का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब हमने ऐसा नियम बनाया है, जिसका परिणाम सकारात्मक दिख रहा है, लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं। वहीं गांव के युवक का कहना है कि अपने गांव में 'गाली मुक्त गांव' की पहल करने वाला मध्य प्रदेश में ये पहला गांव बन गया हैं। लिहाजा बुरहानपुर के इस गांव की देश भर में चर्चा हो रही है,जहां पर ऐसा नियम बनाया गया है। बोरसर गांव को गाली मुक्त गांव बनाने की पहल को एक बड़ी और भाषा के सही उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों ने पूरे गांव में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया है। लोगों को समझाया गया है कि किसी भी प्रकार का विवाद या अभद्र भाषा का उपयोग अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई होगी।