SIR में सबसे बड़ी लापरवाही, दिवंगत राजा देवव्रत सिंह के नाम दर्ज 2 पत्नियां, रानी विभा बोली-सरकार सब अपने हिसाब से सब कर रही

Edited By Desh sharma, Updated: 01 Jan, 2026 03:42 PM

negligence in sir two wives registered under the name of the late raja devvrat

रागढ़ जिले में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान ने लोकतंत्र की जड़ों को ही हिलाकर रख दिया है। जिस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना था वही प्रक्रिया अब भारी लापरवाही गैर जिम्मेदारी और संभावित फर्जीवाड़े...

खैरागढ़ (हेमंत पाल): खैरागढ़ जिले में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान ने लोकतंत्र की जड़ों को ही हिलाकर रख दिया है। जिस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना था वही प्रक्रिया अब भारी लापरवाही गैर जिम्मेदारी और संभावित फर्जीवाड़े के आरोपों में घिर गई है।

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मामला खैरागढ़ रियासत से जुड़े दिवंगत राजा देवव्रत सिंह, पूर्व विधायक एवं सांसद की वैवाहिक स्थिति से जुड़ा है जहां सरकारी रिकॉर्ड में ऐसी गंभीर भूल की गई है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तलाक के बावजूद पद्मा देवी सिंह को लिस्ट में पत्नी के तौर पर किया दर्ज

रानी विभा सिंह ने आरोप लगाया है कि SIR टीम और संबंधित बीएलओ बूथ लेवल ऑफिसर की घोर लापरवाही के चलते आधिकारिक दस्तावेजों में तथ्यों के साथ खुला खिलवाड़ किया गया है। जानकारी के अनुसार पद्मा देवी सिंह जो दिवंगत राजा देवव्रत सिंह की तलाकशुदा पत्नी रही हैं, उन्हें उदयपुर क्षेत्र के बीएलओ द्वारा अब भी दिवंगत देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में दर्ज कर दिया गया। यह गलती नहीं बल्कि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ जैसा गंभीर मामला माना जा रहा है।

कागजों में दो पत्नियां क्या कानून की कोई कीमत नहीं

इस पूरे प्रकरण ने एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। क्या सरकारी दस्तावेजों में एक हिंदू पुरुष के नाम पर दो पत्नियों जैसी स्थिति दर्ज की जा सकती है। यदि हां तो फिर कानून नियम और संवैधानिक मर्यादाओं का क्या अर्थ रह जाता है। यदि नहीं तो फिर यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि चुनाव आयोग SIR प्रभारी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी।

मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सीधा हमला

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गंभीर त्रुटियां मतदाता सूची की पवित्रता को सीधा नुकसान पहुंचाती हैं। मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ होती है लेकिन जब उसमें इस स्तर की लापरवाहियां सामने आएं तो पूरे चुनावी तंत्र की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है।

आम जनता के दस्तावेज सुरक्षित हैं भी या नहीं

रानी विभा सिंह ने तीखे शब्दों में कहा कि जब एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि और राजपरिवार से जुड़े व्यक्ति के दस्तावेजों में ऐसी गंभीर गलती हो सकती है तो आम नागरिकों के रिकॉर्ड किस हालत में होंगे इसकी कल्पना करना भी डरावना है। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की लचर कार्यशैली का आईना है।

जांच नहीं हुई तो संदेह और गहराएगा

रानी विभा सिंह ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी SIR कर्मियों और बीएलओ पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो। सभी त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड को तत्काल सुधारा जाए।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में सिस्टम

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर मामले के सामने आने के बावजूद प्रशासन और चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। मामला उजागर होते ही खैरागढ़ जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है और आम लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इसे भी मानवीय भूल कहकर दबा दिया जाएगा या फिर इस बार जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी। अब निगाहें चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं।

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