Edited By meena, Updated: 06 Mar, 2026 06:56 PM

संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सर्विस एग्जाम-2025 के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इसमें राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया है, वहीं 958 कैंडिडेट्स ने बाजी मारी है...
खंडवा (मुश्ताक मंसूरी) : संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सर्विस एग्जाम-2025 के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इसमें राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया है, वहीं 958 कैंडिडेट्स ने बाजी मारी है। इनमें मध्य प्रदेश के कई प्रतिभाशाली युवाओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस लिस्ट में खंडवा जिले की रूपल जायसवाल ने IAS के लिए सिलेक्ट होकर झंडा गाड़ दिया है।
लोगों के लिए प्रेरणा बन गई रूपल
रूपल धनंजय जायसवाल ने अपनी मेहनत और लगन से इस मुकाम को हासिल किया। उन्होंने UPSC की परीक्षा में 43वीं रैंक लाकर सफलता का ताज पहना है। उनके दूसरे प्रयास में उन्हें 512वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। रूपल की इस सफलता से परिवार और दोस्तों सहित पूरे खंडवा को उन पर गर्व कर रहा है। उनकी कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पिता ठेकेदार और मां हाउसवाइफ
रूपल के पिता धनंजय जायसवाल पेशे से कांट्रेक्टर हैं और मां गृहणी हैं। रूपल के परिवार में उनसे बड़ी एक बहन है और एक छोटा भाई है। सभी रूपल की इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। वही रूपल की सफलता की खबर लगते ही परिवार सहित खंडवा वासियों में खुशी का माहौल है। रिजल्ट की घोषणा होते ही बड़ी संख्या में लोग रूपल के घर पहुंच गए। परिवार ने बिटिया की इस खुशी में जमकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाकर बधाई दी।
नौकरी छोड़ मेहनत की, सपना किया पूरा
खंडवा की रूपल धनंजय जायसवाल ने बताया कि यूपीएससी 2025 में बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए ऑल इंडिया में 43 वीं रैंक प्राप्त की है। रूपल का यह यूपीएससी में तीसरा अटेम्प्ट था, दूसरे प्रयास में रूपल की देशभर में 512 वीं रैंक आई थी, लेकिन उसने पोस्ट ना लेकर फिर से परीक्षा देने की ठानी और लक्ष्य को हासिल किया। रूपल का कहना है कि उसने लॉ की पढ़ाई कर कुछ दिन जॉब किया लेकिन फिर सिविल सर्विसेज के लिए 22 लाख के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज को अपना पूरा समय दिया।
रूपल ने बताया कि मैं प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई को देती थी। वहीं मेरी सफलता में परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है। भविष्य में महिला सशक्तिकरण और पिछड़े तबकों को आगे बढ़ाने को लेकर काम करना चाहती हूं।