Edited By meena, Updated: 16 Jan, 2026 05:14 PM

उज्जैन में 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित श्री महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा, संस्कृति और कला का भव्य संगम देखने को मिला। जनजातीय लोककलाओं, कलायात्रा और...
उज्जैन (विशाल सिंह) : उज्जैन में 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित श्री महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा, संस्कृति और कला का भव्य संगम देखने को मिला। जनजातीय लोककलाओं, कलायात्रा और संगीतमय प्रस्तुतियों से पूरा महाकाल महालोक शिवमय वातावरण में डूब गया। दिनभर चले सांस्कृतिक आयोजनों की शुरुआत जनजातीय लोककलाओं से हुई। डिंडोरी से आए अशोक कुमार मार्को और उनके साथी कलाकारों ने गोंड जनजातीय गुदुमबाजा की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इसके बाद डिंडोरी के ही दयाराम और उनके दल ने बैगा जनजातीय कर्मा नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। सागर के मनीष यादव और उनके साथियों ने बरेदी नृत्य से पारंपरिक रंग बिखेरे, वहीं धार के मनीष सिसोदिया और उनके दल ने भील जनजातीय भगोरिया नृत्य के माध्यम से उत्सव में नई ऊर्जा भर दी।
महोत्सव के तहत उज्जैन के मुकेश शास्त्री और उनके साथियों द्वारा एक भव्य कलायात्रा भी निकाली गई। डमरू वादन दल की विशेष भागीदारी वाली यह यात्रा रामघाट से प्रारंभ होकर हरसिद्धि पाल और बड़ा गणेश होते हुए श्री महाकाल महालोक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।

शाम के सत्र में महाकाल महालोक में मुंबई की प्रसिद्ध टीम ‘द ग्रेट इंडियन क्वायर’ ने ‘शिवा’ नामक संगीतमय प्रस्तुति दी। लाइव पेंटिंग और संगीत के माध्यम से शिव तत्व को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

पांच दिवसीय यह महोत्सव मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, वीर भारत न्यास और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय और सांस्कृतिक परंपराओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है।