MP में ऐतिहासिक दिन, 721 साल बाद धार का वो पहला शुक्रवार जब भोजशाला में नहीं हुई नमाज, वाग्देवी के गूंजे जयकारे

Edited By Desh Raj, Updated: 22 May, 2026 07:59 PM

after 721 years the first friday of dhar when namaz was not offered in bhojshala

भोजशाला प्रकरण के धार के एकमात्र मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आज पहली बार माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला में दर्शन पूजन किया। हिंदू समाज के लिए ये दिन बड़ा ही गौरव का दिन माना गया

(धार): भोजशाला प्रकरण के धार के एकमात्र मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आज पहली बार माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला में दर्शन पूजन किया। हिंदू समाज के लिए ये दिन बड़ा ही गौरव का दिन माना गया क्योंकि 721 वर्षों के संघर्ष के बाद ऐसा शुक्रवार आया जिस दिन भोजशाला में नमाज नहीं हुई। यहां पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पूजा अर्चना चली।

 

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गर्भगृह में माँ की प्रतिमा के सामने गोयल ने संकल्प लिया कि जिस प्रकार उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भोजशाला में हिंदू समाज को पूजा का अधिकार मिला है, उसी प्रकार से रणनीति बनाकर ब्रिटिश संग्रहालय लंदन में कैद माँ वाग्देवी की प्रतिमा को शीघ्र ही ससम्मान भोजशाला में गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

इसके लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री,सनातनी योद्धा विष्णु शंकर जैन और इंदौर हाई कोर्ट के एडवोकेट विनय जोशी के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों में पत्राचार और कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने माँ वाग्देवी और मंदिर के सभी देवी देवताओं से सर्वे भवंतु सुखिन: और समाज के सभी वर्गों की जनता को सुख, समृद्धि,शांति,आरोग्यता मिलने की कामना की। भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए धर्म योद्धाओं के परिवारजनों से तथा संत बाल मुरारी बापू से भी आशीर्वाद लिया।

हजारों की संख्या में उपस्थित  हिंदू समाज भोजशाला की मुक्ति और 365 दिन हिंदुओं के पूजा के अधिकार के हाई कोर्ट के  आदेश से अत्यंत प्रसन्न रहा, याचिकाकर्ता और हिंदू संगठनों के सभी पदाधिकारी और हिंदू समाज जन एक दूसरे को बधाई देते रहे।

 

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