Edited By meena, Updated: 14 Mar, 2026 02:43 PM

शासन अनुशासन के लिए जानी जाने वाली भाजपा इंदौर में दो फाड़ नजर आ रही है। कहा जा सकता है कि संगठन द्वारा सिखाई गया एकता का पाठ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर बेअसर होता दिख रहा है....
इंदौर : शासन अनुशासन के लिए जानी जाने वाली भाजपा इंदौर में दो फाड़ नजर आ रही है। कहा जा सकता है कि संगठन द्वारा सिखाई गया एकता का पाठ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर बेअसर होता दिख रहा है। क्योंकि इंदौर में हाल ही के आयोजनों में पार्टी में गुटबाजी साफ देखने को मिली।
बताया जा रहा है कि भाजपा ने आजीवन सहयोग निधि इकट्ठा करने का अभियान चलाया है। इसमें निर्धारित समय तक आधी राशि भी जमा नहीं हो पाई है। कोर कमेटी की बैठक में इस पर चिंता भी जताई गई है। माना जा रहा है कि इसकी सबसे बड़ी वजह अंदरूनी कलह है। सूत्रों की मानें तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और सीएम मोहन के बीच सैटिंग नहीं हो पा रही है और तुलसी सिलावट के नेता गुट के पदाधिकारी हैं, लेकिन संगठन को उनका सहयोग नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपने नेताओं के लिए ही काम कर रहे है। विधानसभा क्षेत्र 4 और 5 में संगठन का हस्तक्षेप बेहद कम रहता है।
गुटबाजी की चर्चा तब आम हो गई जब भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में कैलाश विजयवर्गीय आए लेकिन सीएम के आने से पहले निकल गए। इसके अलावा विजयवर्गीय अपने गुट को संघ पर बनी फिल्म 'शतक' दिखाने ले गए इसमें अन्य गुट शामिल नहीं हुए। वहीं विधायक मालिनी गौड़ का गुट केरला 2 देखने पहुंचा तो गुटबाजी की चर्चाएं और तेज हो गई।