किसानों को बीमा का पाठ पढ़ाने निकला जागरूकता रथ खुद सवालों के घेरे में, कलेक्टर ने दिखाई हरी झंडी; बीमा की वैधता पर उठे गंभीर सवाल

Edited By Vandana Khosla, Updated: 08 Aug, 2026 01:23 PM

an awareness chariot launched to educate farmers about insurance

लखनादौन (पवन डेहरिया): प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इसी अभियान के तहत कलेक्ट्रेट परिसर से जिला कलेक्टर नेहा मीना ने जागरूकता वाहन को हरी झंडी...

लखनादौन (पवन डेहरिया): प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इसी अभियान के तहत कलेक्ट्रेट परिसर से जिला कलेक्टर नेहा मीना ने जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हालांकि अभियान शुरू होने के साथ ही जागरूकता वाहन के दस्तावेजों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अभियान में उपयोग किया जा रहा वाहन क्रमांक MP 04 GB 6297 है। उपलब्ध परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार उक्त वाहन का बीमा 09 नवंबर 2025 को समाप्त हो चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि वाहन का बीमा निर्धारित तिथि के बाद नवीनीकृत नहीं हुआ था, तो उसे सरकारी जागरूकता अभियान के लिए सड़क पर चलाने की अनुमति किस आधार पर दी गई।

हरी झंडी से पहले दस्तावेजों की जांच पर सवाल

सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में उपयोग किए जाने वाले वाहनों के दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जागरूकता वाहन को रवाना करने से पहले उसके बीमा, फिटनेस, परमिट और प्रदूषण प्रमाणपत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था या नहीं। यदि दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था तो वाहन के बीमा की स्थिति अधिकारियों की जानकारी में क्यों नहीं आई? वहीं यदि सत्यापन नहीं हुआ तो सरकारी अभियान के लिए वाहन का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया, यह भी जांच का विषय है।

कृषि विभाग और RTO की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में वाहन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी से दस्तावेज लिए गए थे या नहीं, इसकी जानकारी भी सामने आना आवश्यक है। साथ ही परिवहन विभाग द्वारा वाहन के दस्तावेजों की वैधता की जांच की गई थी या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि वाहन का बीमा वास्तव में समाप्त पाया जाता है तो यह भी जांच का विषय होगा कि वाहन को अभियान में शामिल करने से पहले दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया।

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सरकारी अभियान के वाहन पर नियमों की अनदेखी क्यों?

आम वाहन चालकों से यातायात नियमों और आवश्यक दस्तावेजों को लेकर लगातार अपील की जाती है। ऐसे में सरकारी योजना के प्रचार में उपयोग होने वाले वाहन के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठना प्रशासन के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए वैध तृतीय-पक्ष बीमा महत्वपूर्ण कानूनी आवश्यकता है। इसलिए वाहन की वर्तमान बीमा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

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भुगतान प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित वाहन को किसी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से अभियान के लिए लिया गया है। यदि ऐसा है तो अनुबंध की शर्तों में वाहन के वैध दस्तावेजों को अनिवार्य किया गया था या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। इसके अलावा यदि वाहन के दस्तावेजों में कमी थी तो क्या विभाग द्वारा उसका भुगतान किया गया या भुगतान की प्रक्रिया जारी है, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

प्रशासन से जांच और स्थिति स्पष्ट करने की मांग

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासन से वाहन के सभी दस्तावेजों की जांच कराने और वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है। यदि वाहन का बीमा समय पर नवीनीकृत नहीं हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग भी की जा रही है। फिलहाल सवाल यह है कि किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करने के लिए निकाला गया वाहन स्वयं वैध बीमा के साथ सड़क पर चल रहा था या नहीं? इस संबंध में जिला प्रशासन, कृषि विभाग और परिवहन विभाग की आधिकारिक स्थिति सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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