Edited By Himansh sharma, Updated: 16 Oct, 2026 01:40 PM

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्योंथर में भाजपा नेताओं के बीच शुरू हुआ विवाद अब संगठन के प्रदेश स्तर तक पहुंच गया है।
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्योंथर में भाजपा नेताओं के बीच शुरू हुआ विवाद अब संगठन के प्रदेश स्तर तक पहुंच गया है। तहसील कार्यालय के भूमि पूजन कार्यक्रम में शिलापट्टिका पर नाम को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ गया कि पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी और वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक अपनी शिकायत पहुंचा दी। अब इस मामले में पार्टी के भीतर भी कार्रवाई और शिकायतों को लेकर हलचल तेज हो गई है।
शिलापट्टिका पर नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला गुरुवार को त्योंथर तहसील कार्यालय के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान सामने आया। पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी शिलापट्टिका से अपना नाम हटाए जाने से नाराज थे। उनका आरोप था कि उनके नाम वाली शिलापट्टिका पहले से तैयार थी, लेकिन बाद में उसे जानबूझकर हटवा दिया गया।
इसी बात को लेकर उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद विधायक सिद्धार्थ तिवारी के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। द्विवेदी ने इसे अपने सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। देखते ही देखते कार्यक्रम में चल रहा विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
'नए-नए विधायक बने हो', टिप्पणी के बाद बढ़ा तनाव
कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी और विधायक सिद्धार्थ तिवारी के बीच तीखी बहस हुई। द्विवेदी ने तिवारी से कहा कि अभी नए-नए विधायक बने हो, तुम्हारा यह कदम याद रखा जाएगा। इस टिप्पणी के बाद दोनों पक्षों के समर्थक भी आमने-सामने आ गए।
कार्यक्रम स्थल पर नारेबाजी शुरू होने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति ऐसी बनी कि नेताओं और उनके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा के दो नेताओं के बीच इस तरह की तनातनी ने स्थानीय सियासत में नई चर्चा छेड़ दी।

सांसद जनार्दन मिश्रा ने संभालने की कोशिश की स्थिति
विवाद बढ़ता देख सांसद जनार्दन मिश्रा ने हस्तक्षेप किया। वह अपनी जगह से उठकर पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी के पास पहुंचे और उनका हाथ पकड़कर उन्हें समझाने तथा शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि, इसके बावजूद द्विवेदी ने भूमि पूजन स्थल और बाद में मंच से भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
वहीं, विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा परिवार के भीतर का मामला बताया था। उनका कहना था कि बड़े परिवारों में इस तरह की छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। उन्होंने विवाद पर ज्यादा विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया।
प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची शिकायत, संगठन के रुख पर नजर
त्योंथर में शुरू हुई यह खींचतान अब केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से शिकायत किए जाने के बाद मामला संगठन के स्तर पर पहुंच गया है। पार्टी फोरम पर भी एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की बात सामने आई है।
अब इस पूरे विवाद में प्रदेश नेतृत्व का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिलापट्टिका से नाम हटाए जाने को लेकर शुरू हुई नाराजगी ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में नेताओं के बीच मतभेद को सार्वजनिक कर दिया है। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को किस तरह सुलझाता है और आगे संगठन के भीतर क्या कदम उठाए जाते हैं।