Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Jul, 2026 08:23 PM
मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों का दौर निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
मंदसौर (शाहरूख मिर्ज़ा): मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों का दौर निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। प्रदेश अध्यक्ष और विभिन्न मोर्चों के गठन के बाद अब भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर इस पद को लेकर लगातार बैठकों और विचार-विमर्श का दौर जारी है।संगठन के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस बार नियुक्ति में केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़, भविष्य की राजनीतिक रणनीति और आगामी चुनावी चुनौतियों को भी प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अब अल्पसंख्यक समाज के बीच अपने जनाधार को और मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। ऐसे में अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का चयन केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि पार्टी की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
इन नामों पर चल रहा मंथन
सूत्रों के अनुसार, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए शाहनवाज़ उद्दीन शेख़ (छन्नू भैया), वाहिद कुरैशी, एडवोकेट अनवर अहमद मंसूरी, डॉ. गुलरेज शेख, नासिर शाह, मुख्तियार भाई (टीकमगढ़), गुड्डू टायर (भोपाल) सहित कुछ अन्य नामों पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी ने अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
शाहनवाज़ उद्दीन शेख़ (छन्नू भैया) का नाम चर्चा में
भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शाहनवाज़ उद्दीन शेख़ (छन्नू भैया) का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय कबड्डी संघ (AKFI) के उपाध्यक्ष तथा सामाजिक समरसता विचार मंच के अखिल भारतीय संयोजक के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा वे भाजपा संगठन में भी विभिन्न दायित्व निभा चुके हैं।
संगठन के भीतर उनकी पहचान एक सक्रिय, समन्वयकारी और कार्यकर्ताओं के बीच सहज उपलब्ध नेता के रूप में मानी जाती है। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि वे प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में रहे हैं तथा उनका संगठनात्मक अनुभव उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पार्टी की ओर से नहीं की गई है।
वाहिद कुरैशी पर भी संगठन की नजर
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर संगठन के भीतर संभावित नामों पर चर्चा जारी है। राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में खंडवा के वाहिद कुरैशी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।
पसमांदा समाज से आने वाले वाहिद कुरैशी पिछले लगभग दो दशकों से भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता के रूप में की। इसके बाद भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा में प्रदेश मंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष सहित कई संगठनात्मक दायित्व निभाए।
वाहिद कुरैशी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा मध्य प्रदेश में मंच के प्रांत संयोजक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। संगठनात्मक सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी उनका संवाद और संपर्क रहा है।
संगठनात्मक कार्यशैली, कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता और लंबे अनुभव के आधार पर उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चा के संभावित दावेदारों में देखा जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि उन्हें भाजपा और संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन प्राप्त रहा है।
संगठन के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि पार्टी सामाजिक प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक अनुभव और नए नेतृत्व के समन्वय को प्राथमिकता देती है, तो वाहिद कुरैशी की दावेदारी मजबूत मानी जा सकती है।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष पद के संबंध में किसी भी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा।
एडवोकेट अनवर अहमद मंसूरी का नाम भी चर्चा में
एडवोकेट अनवर अहमद मंसूरी का नाम भी संभावित दावेदारों की सूची में चर्चा का विषय बना हुआ है। वे पूर्व में मध्य प्रदेश हज कमेटी के डायरेक्टर रह चुके हैं तथा लंबे समय तक जिला शांति समिति के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सामाजिक, संगठनात्मक और जनहित के मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें एक मजबूत ओबीसी चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उनका नाम संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
संगठन नए चेहरे पर लगा सकता है दांव
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि संगठन इस बार ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है, जो प्रदेशभर में सक्रिय संगठन खड़ा करने के साथ-साथ अल्पसंख्यक समाज के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सके।
इसके साथ ही ऐसे नेतृत्व को प्राथमिकता दिए जाने की भी चर्चा है, जो युवा कार्यकर्ताओं को अवसर देने और संगठन में बेहतर समन्वय स्थापित करने की क्षमता रखता हो।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा मिशन 2027 और 2028 को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक मोर्चा को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही कारण है कि इस नियुक्ति को संगठन में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगस्त के पहले पखवाड़े में हो सकती है घोषणा
राजधानी के राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह में की जा सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय भाजपा का प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संगठन की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी।