Edited By meena, Updated: 18 Jul, 2026 07:13 PM

दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में विस्तार और व्यापक फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं...
भोपाल: दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में विस्तार और व्यापक फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक कई मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं, कुछ की विदाई हो सकती है, जबकि आधा दर्जन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
मध्यप्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद मोहन सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की चर्चाएं जोरों पर हैं। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री लखन पटेल से विभाग वापस लेने के फैसले के बाद सत्ता और संगठन दोनों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि उपचुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रिमंडल का विस्तार करने के साथ-साथ व्यापक फेरबदल भी कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस बार मंत्रिमंडल में करीब छह नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि तीन से चार मौजूदा मंत्रियों की विदाई या उनके विभागों में बदलाव संभव है। नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ पिछले दो वर्षों के कामकाज, विभागीय प्रदर्शन, जनप्रतिनिधियों के फीडबैक और संगठन तक पहुंची शिकायतों को भी आधार बनाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा कराई है और इसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कौन मंत्री अपनी जिम्मेदारी बरकरार रखेगा और किसके विभाग में बदलाव होगा। इनमें ऐसे मंत्री शामिल हैं जिनके विवादित बयानों या कार्यशैली के कारण सरकार और संगठन को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि प्रभावशाली विभागों की जिम्मेदारी नए चेहरों को देकर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को अपेक्षाकृत हल्के विभाग सौंपे जा सकते हैं।
लखन पटेल से विभाग वापस लिए जाने के बाद अन्य मंत्रियों की भी चिंता बढ़ गई है। चर्चा है कि कुछ और मंत्रियों के खिलाफ भी शिकायतें संगठन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची हैं, जिनकी समीक्षा जारी है। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है तो कुछ और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा इस विस्तार के जरिए ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ब्राह्मण वर्ग के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश करेगी, ताकि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके। फिलहाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास वन एवं पर्यावरण, पशुपालन एवं डेयरी समेत कई महत्वपूर्ण विभाग हैं। व्यस्तताओं के चलते वे तीन-चार अन्य विधायकों को ये जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहले ही सार्वजनिक रूप से संकेत दे चुके हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार होगा, हालांकि उन्होंने समय-सीमा स्पष्ट नहीं की थी। ऐसे में दिल्ली नेतृत्व से हरी झंडी मिलते ही बड़ा फेरबदल किया जाएगा। माना जा रहा है कि 24 जुलाई को विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होगा, जबकि 3 अगस्त को दत्तिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम घोषित होना है। ऐसे में भाजपा हाईकमान नहीं चाहता कि उपचुनाव के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार से कोई राजनीतिक संदेश या राजनीतिक असंतोष का माहौल बने। इसलिए माना जा रहा है कि दतिया नतीजों के तुरंत बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा सकता है।