Edited By Vikas Tiwari, Updated: 19 Jul, 2026 02:47 PM
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठ गया है। रविवार को भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक में 'मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता-2026' (MP UCC 2026) के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई। अब इसे 20 जुलाई से शुरू हो रहे...
भोपाल: मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठ गया है। रविवार को भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक में 'मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता-2026' (MP UCC 2026) के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई। अब इसे 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। इस बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान ‘अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा? ’राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।
सरकार का दावा है कि नया कानून लागू होने के बाद धर्म के आधार पर अलग-अलग नागरिक कानूनों की जगह विवाह, तलाक, संपत्ति, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम सभी नागरिकों के लिए समान होंगे।
CM मोहन के बयान का क्या मतलब है?
कटनी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था कि ‘मध्यप्रदेश में वही रहेगा जो एक ही शादी करेगा’ उनका इशारा प्रस्तावित UCC के उस प्रावधान की ओर माना जा रहा है, जिसके तहत धर्म कोई भी हो, पहली पत्नी या पति के रहते और कानूनी तलाक लिए बिना दूसरी शादी करना अपराध माना जाएगा। अभी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हिंदुओं के लिए बहुविवाह प्रतिबंधित है, जबकि मुस्लिम पर्सनल लॉ में कुछ परिस्थितियों में चार विवाह की अनुमति मानी जाती है। UCC लागू होने के बाद सभी नागरिकों पर एक जैसा कानून लागू होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या होंगे नए नियम?
UCC का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा लिव-इन रिलेशनशिप है। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार लिव-इन संबंधों को कानूनी दायरे में लाने की तैयारी है।
- 1. लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
यदि कोई युवक-युवती लिव-इन में रहना चाहते हैं तो उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपना संबंध रजिस्टर कराना होगा।
- 2. पुलिस और माता-पिता को मिलेगी सूचना
रजिस्ट्रेशन होने के बाद संबंधित थाना और दोनों पक्षों के माता-पिता को इसकी जानकारी भेजी जाएगी।
- 3. बिना रजिस्ट्रेशन रहने पर कार्रवाई
यदि कोई कपल बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहता है और शिकायत होती है, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
- 4. गलत जानकारी देने पर सजा
गलत पहचान बताने या रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर तीन महीने तक की जेल का प्रावधान प्रस्तावित है।
- 5. शादीशुदा होकर लिव-इन में रहे तो 5 साल तक की सजा
यदि कोई व्यक्ति पहले से विवाहित है और किसी अन्य के साथ लिव-इन में रहता है, तो उसके खिलाफ पांच साल तक की सजा का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
लिव-इन में रहने वाली महिला को मिलेगा कानूनी संरक्षण
सरकार का प्रस्ताव है कि यदि पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है तो महिला को भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का अधिकार मिलेगा। इससे महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलने का दावा किया जा रहा है।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को क्या मिलेगा?
प्रस्तावित कानून के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को भी वैधानिक अधिकार दिए जाएंगे। बच्चों को मिल सकते हैं ये अधिकार…
माता-पिता की कानूनी पहचान
माता और पिता दोनों की संपत्ति में अधिकार
शिक्षा और भरण-पोषण की कानूनी सुरक्षा
समाज में वैध संतान का दर्जा
सरकार का कहना है कि बच्चों को केवल माता-पिता के रिश्ते की वजह से अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाएगा।
क्या सात फेरे और निकाह खत्म हो जाएंगे?
इस सवाल पर सरकार ने साफ किया है कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। हिंदू विवाह के सात फेरे, मुस्लिम निकाह, सिख आनंद कारज और अन्य धार्मिक परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी। UCC केवल कानूनी अधिकारों और नागरिक प्रक्रियाओं को समान करेगा।
किन लोगों पर लागू नहीं होगा UCC?
कमेटी ने अनुसूचित जनजातियों (ST), घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। मध्यप्रदेश में लगभग 21 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदाय की है। संविधान उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था को विशेष संरक्षण देता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से जुड़ा है UCC का आधार
समान नागरिक संहिता की मांग नई नहीं है। 1995 के चर्चित सरला मुद्गल केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धर्म परिवर्तन करके बहुविवाह करने जैसी स्थितियों को रोकने के लिए समान नागरिक संहिता पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। इसके बाद तीन तलाक कानून और अब UCC को उसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब UCC विधेयक विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। बहस, संशोधन और पारित होने के बाद ही अंतिम कानून लागू होगा। इसलिए फिलहाल कई प्रावधान प्रस्तावित स्वरूप में हैं और अंतिम कानून में बदलाव संभव है। मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है जहां समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जा सकती है। यदि विधेयक पारित होता है तो विवाह, तलाक, बहुविवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, महिलाओं के अधिकार और बच्चों की कानूनी स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।