BJP की बड़ी नियुक्तियों की अगली सूची जल्द! पुराने दिग्गज नेताओं को फिर मिलेगा मौका, ये नाम सबसे आगे

Edited By Himansh sharma, Updated: 27 Apr, 2026 12:14 PM

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मध्यप्रदेश भाजपा में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी फिलहाल बैकफुट पर दिखाई दे रही है।

भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी फिलहाल बैकफुट पर दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी संगठन और सत्ता के बीच बेहतर संतुलन बनाती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत अब पार्टी पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से मुख्यधारा में लाने की तैयारी में है। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा जयभान सिंह पवैया की वापसी को लेकर हो रही है। एक समय संगठन की गुटबाजी के चलते हाशिए पर पहुंचे पवैया को वित्त आयोग के जरिए फिर सक्रिय भूमिका दी गई है। इसे भाजपा नेतृत्व का साफ संदेश माना जा रहा है कि अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें दोबारा जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत किया जाएगा।

इधर निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में लगातार राजनीतिक नियुक्तियों का दौर जारी है। वित्त आयोग में जयभान सिंह पवैया, अनुसूचित जाति आयोग में डॉ. कैलाश जाटव, अनुसूचित जनजाति आयोग में रामलाल रौतेल, राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम में केशव सिंह बघेल और ग्वालियर मेला प्राधिकरण में अशोक जादौन को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। खास बात यह रही कि इन नियुक्तियों को लेकर भाजपा के किसी भी बड़े गुट ने खुलकर श्रेय लेने की कोशिश नहीं की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता और संगठन ने सभी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया है, जिससे गुटीय संतुलन भी बना रहे और अनुभवी चेहरों को सम्मान भी मिले।

अब पार्टी के भीतर अगली सूची को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।  केशव भदौरिया, पंचूलाल प्रजापति, अजय सिंह, संजय तीर्थानी, मनोहर पोरवाल, गोविंद काकड़, प्रवीण सोनी, रवि सोलंकी, मुकेश यादव, रवि वर्मा, राममोहन बघेल, साधना स्थापक, समीक्षा गुप्ता, सोनम निनामा, अर्चना गुप्ता, मोनिका वट्टी और सीमा सिंह जैसे नामों पर गंभीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक इन नेताओं के संगठनात्मक रिकॉर्ड और राजनीतिक सक्रियता की समीक्षा की जा रही है। माना जा रहा है कि निगम-मंडलों की अगली सूची जल्द जारी हो सकती है, जिसमें इन नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। भाजपा की यह रणनीति साफ संकेत दे रही है कि पार्टी 2028 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नए और पुराने चेहरों के संतुलन के साथ आगे बढ़ाना चाहती है।

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