भाइचारे पर ग्रहण,मुस्लिम समिति की अपील, ईद पर सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों से करें खरीददारी,अपनी कौम मजबूत करें

Edited By Desh Raj, Updated: 19 Mar, 2026 05:38 PM

buy goods for eid from shopkeepers within your own community

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में त्योहारों के मौके पर एक नया विवाद सामने आ रहा है । दरअसल  ईद से पहले मुस्लिम संगठनों ने अपील की है कि रमजान और ईद की खरीदारी सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों से की जाए।

(भोपाल): मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में त्योहारों के मौके पर एक नया विवाद सामने आ रहा है । दरअसल  ईद से पहले मुस्लिम संगठनों ने अपील की है कि रमजान और ईद की खरीदारी सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों से की जाए। इसी अपील को लेकर विवाद शुरु हो गया है। इस अपील के बाद  बाजारों में रमजान की रौनक शुरू होने से पहले ही विवाद  स्तिथि बनती नजर आ रही है। इसके बाद सियासत भी शुरु हो गई है।  इस अपील के बाद धार्मिक सौहार्द को लेकर भी सवाल उठ रहे है।

ईद त्योहार की खरीदारी केवल मुसलमान दुकानदारों से ही करने की अपील

भोपाल अहले सुन्नत समिति और AIMIM के सदस्यों ने एक मुहिम छेड़ी है। इनका कहना है कि मुसलमान अपने त्योहार की खरीदारी केवल मुसलमान दुकानदारों से ही करें। अपने ही दुकानदारों से खरीदकारी करके उनको मजबूत किया जाए। मुस्लिम संगठन अहले सुन्नत समिति के महासचिव और AIMIM नेता तौकीर निजामी इसको लेकर तर्क  दिया है कि जब देश में एक पक्ष अपनों से व्यवहार की बात कर रहा है, तो वे भी अपने समाज की आर्थिक मजबूती के लिए यह अपील कर रहे हैं। भाईजान, भाईजानों से ही रमजान और ईद की खरीदारी करें।  मुसलमान कौम की आर्थिक हालत को मजबूत करें. समाज की माली हालात सुधारने के लिए अपने पैसे का सही इस्तेमाल करें

वहीं सुन्नत समिति के इस व्यवहार पर हिंदू संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। हिंदू उत्सव समिति भी इस अपील के बाद मैदान में उतरी

अहले सुन्नत समिति के इस बयान के सामने आते ही हिंदू उत्सव समिति ने भी मोर्चा संभाल लिया है।  पलटवार करते हुए हिंदु उत्सव समिति ने कहा है कि मुस्लिम संगठन पहले मस्जिदों और पर्चों के जरिए ऐसी अपील करते थे, लेकिन अब वे इसेके लिए खुले तौर पर मैदान में आ गए हैं।  खुलकर सार्वजनिक मंचों से मुसलमान दुकानदारों से सामान लेने की अपील कर रहे हैं। इसलिए हम भी नवरात्रि के मौके पर हिंदुओं से अपील करना चाहेंगे कि हमारे लोग भी सामान हिंदुओं से ही खरीदें।

लिहाजा इस तरह की अपीलों से धार्मिक भावना को भी चोट पहुंच रही है। मेल-मिलाप और भाईचारे की पहचान वाले त्योहार मजहबों और धर्मों में बंटते जा रहे हैं।

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