Edited By Himansh sharma, Updated: 31 Oct, 2026 02:29 PM

जिले में राइस मिलों और धान के कारोबार को लेकर इन दिनों जांच और कार्रवाई की चर्चा तेज है।
डिंडोरी। (सुरेंद्र सिंह): जिले में राइस मिलों और धान के कारोबार को लेकर इन दिनों जांच और कार्रवाई की चर्चा तेज है। कुछ राइस मिलों पर धान की बिक्री और कथित अनियमितताओं को लेकर जांच की जा रही है। इस कार्रवाई के बीच अब एक पुराना मामला भी चर्चा में आ गया है, जिसमें एक राइस मिल से करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कथित कमी सामने आने की बात कही जाती है।
वर्तमान जांच को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर प्रशासन की कार्रवाई कुछ चुनिंदा राइस मिलों तक ही सीमित क्यों दिखाई दे रही है? क्या जिले की अन्य राइस मिलों और उनसे जुड़ी ट्रेडिंग फर्मों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं या नहीं?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ वर्ष पहले जिले की एक राइस मिल में जांच के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कथित कमी सामने आई थी। इस मामले में कानूनी कार्रवाई होने और प्रकरण न्यायालय में लंबित रहने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, पुराने मामले में वास्तविक धान की कमी, जिम्मेदारी, वसूली और वर्तमान न्यायालयीन स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से होना जरूरी है।
अब वर्तमान कार्रवाई के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासन पुराने प्रकरण की फाइल भी दोबारा खंगालेगा? यदि उस समय करोड़ों रुपये के धान की कमी का मामला सामने आया था, तो उसकी जांच और कार्रवाई की मौजूदा स्थिति क्या है?
चर्चा में रही राइस मिल के वर्तमान कारोबार पर भी सवाल
पुराने प्रकरण से कथित रूप से जुड़ी राइस मिल को लेकर स्थानीय स्तर पर एक और चर्चा है। बताया जाता है कि मिल में धान लेकर पहुंचने वाले वाहनों की लंबी कतारें अक्सर दिखाई देती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मिल के वर्तमान स्टॉक, धान की आवक, भंडारण और मिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड का भी विस्तृत सत्यापन किया गया है?
यदि प्रशासन धान खरीदी से लेकर भंडारण, परिवहन, मिलिंग और चावल जमा करने तक की पूरी व्यवस्था की जांच कर रहा है, तो सभी संबंधित राइस मिलों के लिए समान जांच प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
सिर्फ चुनिंदा मिलों पर कार्रवाई क्यों?
वर्तमान जांच के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल जांच की निष्पक्षता और एकरूपता को लेकर है। यदि किसी एक या कुछ राइस मिलों में अनियमितताओं की आशंका पर कार्रवाई की जा रही है, तो जिले की अन्य संबंधित मिलों और उनसे जुड़ी ट्रेडिंग फर्मों के रिकॉर्ड भी समान मानकों पर जांचे जाने चाहिए। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जांच का दायरा किन-किन राइस मिलों तक है, पुराने कथित धान कमी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और क्या वर्तमान स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है?
फिलहाल जिले में यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या मौजूदा कार्रवाई के साथ वर्षों पुराने करोड़ों के कथित धान कमी वाले मामले की फाइल भी खुलेगी या वह मामला पुराने रिकॉर्ड तक ही सीमित रह जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई और आधिकारिक जवाब पर टिकी है।