Edited By Desh Raj, Updated: 01 Jul, 2026 06:12 PM

मध्य प्रदेश में आजकल एक “लैटर बम” से हलचल मची हुई है। ये पत्र ऐसा है जिसने सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष में भी हड़कंप मचा रखा है। जी हां कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक कथित पत्र प्रदेश मे सुर्खियों में हैं।
(देश शर्मा): मध्य प्रदेश में आजकल एक “लैटर बम” से हलचल मची हुई है। ये पत्र ऐसा है जिसने सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष में भी हड़कंप मचा रखा है। जी हां कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक कथित पत्र प्रदेश मे सुर्खियों में हैं। इंदौर की कथित उपेक्षा का इस पत्र में जिक्र है और इसके सामने आने के बाद बवाल मचा हुआ है। वहीं वायरल पत्र के बारे में पूछे जाने पर कैलाश ने इससे पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन सौ सवालों के बीच एक ही सवाल उठ रहा है कि इतने कद्दावर और वरिष्ठ मंत्री को पत्र का सहारा क्यों लेना पड़ा है।
आखिर दिग्गज कैलाश विजयवर्गीय को क्यों लेना पड़ा पत्र का सहारा?
जैसा की सभी जानते हैं कि कैलाश अपने बेबाक बयानों और अलग तरह की कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वो कोई भी बात और मुद्दा उठाते हैं तो संकोच नहीं करते हैं और जो बोलना होता है सीधा बोल देते हैं। मंच कोई भी हो, माहौल कैसा भी वो कैलाश अपनी बात आगे रखने में हिचकिचाते नहीं हैं। पर यहां पर सवाल उठ रहा है कि इतने सीनियर और दिग्गज नेता होते हुए भी कैलाश को पत्र लिखने की आखिर क्या जरुरत पड़ी। क्या उनकी मंत्रीमंडल में सुनी नहीं जा रही है, या प्रदेश के मुखिया के साथ उनकी बातचीत नहीं है।
क्या कैलाश नाराज हैं या कोई असंतोष!
इस कथित पत्र को लिखने के पीछे की वजह का खुलासा नहीं हो रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि या तो कैलाश सरकार से नाराज चल रहे हैं या उनमें किसी बात को लेकर असंतोष है। हालांकि इसका एक वाक्या इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला था। उस वक्त केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और सीएम मोहन यादव मंच पर लोकार्पण कार्यक्रम में भाग ले रहे थे लेकिन कैलाश विजयवर्गीय दूर कुर्सी पर बैठे थे। उनको इस तरह से अकेले बैठे देखकर मंत्री तुलसी सिलावट ने उनका हाथ पकड़कर कुर्सी से उठाया था। उस वक्त भी कैलाश के इस व्यवहार की काफी चर्चा हुई थी। अब मध्य प्रदेश की राजनीति में उनका कथित लैटर बम तहलका मचा रहा है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वो सीएम मोहन से बात नहीं करते या डायरेक्ट कोई बात नहीं करना चाहते। जिसके चलते वो पत्र का सहारा ले रहे हैं। इसके साथ ही सवाल ये भी उठ रहा है कि कैलाश इंदौर को विकासात्मक कार्यों में नजरअंदाज करने को लेकर नाराज हैं जैसा कि पत्र में जिक्र है।
हालांकि पत्र लिखने से मुकरे कैलाश !
वहीं मामले के तूल पकड़ने के साथ ही कुछ ही घंटों के भीतर कैलाश ने भी कोई पत्र लिखने वाली बात से मना कर दिया। मीडिया ने उनसे सीधे सवाल किया कि क्या उन्होंने ऐसा कोई पत्र लिखा है और वे किसके दबाव में बदल गए, तो मंत्री जी ने साफ पल्ला झाड़ लिया। कहा, "मेरे को कोई जानकारी नहीं है। जिस समाचार पत्र ने छापा है उनसे ही पूछें कि ये जानकारी कहां से आई है। सही है कि गलत... मुझे कोई जानकारी नहीं है।"
कैलाश ने समाचार पत्रों पर कार्रवाई को लेकर नहीं कही कोई बात...
हालांकि कैलाश विजयवर्गीय किसी भी पत्र को लिखने वाली बात से इनकार कर रहे हैं और कह रहें है कि जिसने ये बात छापी है उससे ही पूछा जाए। इसलिए यहां सवाल ये उठता है कि अगर कैलाश ने पत्र नहीं लिखा,जैसा कि वो दावा कर रहे हैं तो वो उन समाचार पत्रों पर कार्रवाई की बात क्यों नहीं कर रहे जो उनका हवाला देकर पत्र लिखने की बात कर रहे हैं। अगर कोई कैलाश का नाम लेकर कुछ छाप रहा है तो मंत्री जी कार्रवाई की बात न करके उनसे जानकारी मांगने की बात कर रहे हैं। लिहाजा इस लैटर बम से प्रदेश की राजनीति में हलचल है। कैलाश के कथित पत्र ने जहां सत्ता पक्ष को सांसत में डाल रखा है वहीं विपक्ष को हमलावर होने का मौका दिया है। फिलहाल कयास ही लगाए जा रहें कि कैलाश सरकार से नाखुश हैं या फिर अपनी और इंदौर की अनदेखी से ।