MP BJP में फिर घमासान! अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष पर लगाए प्रताड़ना के आरोप, CM तक पहुंचा विवाद; भोपाल तलब हुए दोनों

Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Oct, 2026 11:35 AM

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मध्यप्रदेश भाजपा में नेताओं के बीच जारी खींचतान के बीच अब विंध्य विकास प्राधिकरण का विवाद भी सुर्खियों में आ गया है।

भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में नेताओं के बीच जारी खींचतान के बीच अब विंध्य विकास प्राधिकरण का विवाद भी सुर्खियों में आ गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति ने उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिकायत भेजी है। अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष पर मानसिक प्रताड़ना देने, प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने और अधिकारियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

इस विवाद की गूंज केवल सरकार तक सीमित नहीं है। शिकायत की प्रतियां भाजपा के प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और रीवा-शहडोल क्षेत्र के संबंधित संगठन पदाधिकारियों को भी भेजी गई हैं। ऐसे में प्राधिकरण के भीतर चल रही खींचतान अब पार्टी संगठन के लिए भी चुनौती बनती दिखाई दे रही है।

प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप का आरोप

पंचूलाल प्रजापति ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह के हस्तक्षेप से प्राधिकरण के कामकाज पर असर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि रीवा के कलेक्टर और कमिश्नर पर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा शहडोल में पदस्थ जिला योजना अधिकारी डीके अहिरवार की जॉइनिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

अध्यक्ष का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण प्राधिकरण के कामकाज और उनकी जिम्मेदारियों के निर्वहन में परेशानी पैदा हो रही है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

जातिसूचक टिप्पणी का आरोप, फिर वापस ली शिकायत

विवाद ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब पंचूलाल प्रजापति ने उपाध्यक्ष पर कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए रीवा के अजाक थाने में शिकायत की। अध्यक्ष के मुताबिक, इस तरह के व्यवहार से उनके सम्मान, प्रतिष्ठा और पद की गरिमा प्रभावित हुई। हालांकि, शिकायत दर्ज कराने के अगले ही दिन उन्होंने इसे वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

CEO की नियुक्ति से शुरू हुई खींचतान?

प्राधिकरण में विवाद की एक बड़ी वजह मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को भी माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने पहले CEO को हटवाकर तृतीय श्रेणी अधिकारी केडी साकेत को इस पद की जिम्मेदारी दिलाई थी। इस फैसले पर प्राधिकरण के दोनों उपाध्यक्षों ने आपत्ति जताई।

इसके बाद सरकार ने केडी साकेत की जगह प्रथम श्रेणी अधिकारी डीके अहिरवार को CEO नियुक्त कर दिया। इसी घटनाक्रम के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच मतभेद और गहरे होने की बात सामने आई। अब यह विवाद शिकायतों के जरिए मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंच गया है।

उपाध्यक्ष अजय सिंह ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह ने कहा कि उन्हें अध्यक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोपों को भी उन्होंने गलत बताया और कहा कि ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं हैं।

फिलहाल, इस विवाद में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। अब सबकी नजर भोपाल में होने वाली बातचीत और भाजपा संगठन के अगले कदम पर टिकी है। संगठन की पहल से विवाद सुलझता है या प्राधिकरण के भीतर चल रही यह खींचतान आगे और बढ़ती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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