Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Mar, 2026 10:10 AM

डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के नियमों में बदलाव लागू किए जा रहे हैं
भोपाल: डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के नियमों में बदलाव लागू किए जा रहे हैं, जिससे यूपीआई, नेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट से भुगतान करने का तरीका पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। नए नियमों के तहत अब सिर्फ एक पिन या सिंगल क्लिक से पेमेंट पूरा नहीं होगा, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा चरण भी जरूरी होगा।
क्या है नया बदलाव?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत हर ट्रांजेक्शन के लिए कम से कम दो अलग-अलग माध्यमों से पहचान सत्यापित करनी होगी। अभी तक कई प्लेटफॉर्म पर केवल UPI PIN या एक ही पासवर्ड से ट्रांजेक्शन पूरा हो जाता था, लेकिन अब हर भुगतान में एक अतिरिक्त वेरिफिकेशन स्टेप जोड़ा जाएगा।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
नए नियमों के अनुसार, हर ऑनलाइन भुगतान में दो स्तर की सुरक्षा होगी, जैसे: पिन और ओटीपी (OTP) ,बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/फेस आईडी) और डिवाइस वेरिफिकेशन ,पासवर्ड और हार्डवेयर/टोकन आधारित ऑथेंटिकेशन इनमें से एक फैक्टर डायनामिक होगा, यानी हर बार अलग और रियल-टाइम में जनरेट होने वाला कोड या वेरिफिकेशन।
ग्राहकों को मिलेंगे विकल्प
बैंकों और फिनटेक कंपनियों को ग्राहकों को अलग-अलग ऑथेंटिकेशन विकल्प देने होंगे, ताकि यूजर अपनी सुविधा और सुरक्षा के अनुसार तरीका चुन सकें।
क्या होगा फायदा?
फ्रॉड और हैकिंग पर रोक:
दोहरी सुरक्षा होने से साइबर अपराधियों के लिए अकाउंट हैक करना मुश्किल होगा
सेफ ट्रांजेक्शन: अनऑथराइज्ड पेमेंट की संभावना कम होगी
जिम्मेदारी तय: नियमों के उल्लंघन पर बैंक और सर्विस प्रोवाइडर जिम्मेदार होंगे ,अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन पर भी असर..
क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन के लिए भी ये नियम लागू होंगे, हालांकि इन्हें पूरी तरह से लागू करने की समयसीमा अलग रखी गई है।
निष्कर्ष:
1 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट का अनुभव थोड़ा अलग जरूर होगा, लेकिन यह बदलाव यूजर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। अब हर ट्रांजेक्शन पहले से ज्यादा सुरक्षित और नियंत्रित होगा।