Edited By meena, Updated: 23 Mar, 2026 07:00 PM

यह मामला राज्य की राजनीति और सामाजिक संतुलन दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कोर्ट में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें आरक्षण बढ़ाने की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए गए हैं...
भोपाल : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य के बहुचर्चित OBC आरक्षण मामले पर सुनवाई तेज हो गई है। 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए गए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। यह मामला राज्य की राजनीति और सामाजिक संतुलन दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कोर्ट में इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें आरक्षण बढ़ाने की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए गए हैं।
कोर्ट का निर्देश: 2 अप्रैल को सभी पक्ष रखें अपना पक्ष
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्ष 2 अप्रैल को अपने-अपने केस की पूरी जानकारी और तर्क पेश करें। अदालत चाहती है कि सभी पहलुओं को विस्तार से समझा जाए ताकि अंतिम निर्णय तथ्यों और कानूनी आधार पर लिया जा सके। इस निर्देश के बाद अब सरकार, याचिकाकर्ता और अन्य पक्षों के बीच कानूनी तैयारी तेज हो गई है।
16 अप्रैल को होगी अंतिम सुनवाई
कोर्ट ने यह भी तय किया है कि इस मामले की फाइनल सुनवाई 16 अप्रैल को की जाएगी। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर निर्णायक स्थिति बन सकती है। यदि अदालत इस पर कोई बड़ा फैसला सुनाती है, तो इसका सीधा असर राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं और आरक्षण व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए सभी पक्ष इस सुनवाई को लेकर गंभीरता से तैयारी में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक असर
OBC आरक्षण का मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में हमेशा से संवेदनशील रहा है। 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होने या न होने से लाखों उम्मीदवारों और सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया प्रभावित होती है। साथ ही, यह फैसला सामाजिक संतुलन और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व पर भी असर डालेगा। ऐसे में इस मामले पर हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।