MP में खेती हुई हाईटेक: AI, सैटेलाइट और ड्रोन से होगी फसलों की निगरानी, किसानों को मिलेगा सटीक फायदा

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 14 Mar, 2026 07:07 PM

mp government adopts ai and satellite tech for smart crop monitoring

मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली के माध्यम से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और...

भोपाल: मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली के माध्यम से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीक से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिल रहा है तथा किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि SARA App और UNNATI Agri-GIS Platform के माध्यम से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। डीप लर्निंग तकनीक के जरिए लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर खेत स्तर पर बोई गई फसलों के प्रकार का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे फसलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन संभव हो रहा है। सरकार द्वारा उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल की मदद से खसरा स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए पटवारी हल्का स्तर पर उत्पादन का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं के निर्माण, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में जहां फसल पहचान की सटीकता लगभग 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर करीब 85 प्रतिशत हो गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों की डिजिटल मैपिंग की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन संभव होगा और किसानों को मुआवजा दिलाने में भी मदद मिलेगी।

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